क्या आप यकीन करेंगे, जिन भगवान शिव के दर्शन करने मात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है, उन्हीं महादेव ने भी सदियों पहले मोक्ष पाने के लिए यहां तपस्या की थी। हम आपको बता रहे हैं उसी रोचक घटना के बारे में।
उत्तराखंड के चंपावत जिले में बनी पाताल रुद्रेश्वर गुफा किसी चमत्कार से कम नहीं। मान्यता है कि जब यहां भगवान शिव ने तपस्या की थी इसके बाद ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति हुई थी।
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पाताल रुद्रेश्वर
इतना ही नहीं देवी दुर्गा ने इस गुफा का रास्ता खुद बताया था। 40 मीटर लंबी और 10 मीटर चौड़ी पाताल रुद्रेश्वर गुफा की खोज 1993 में की गई थी। कहा जाता है कि देवी दुर्गा ने एक 14 साल के बालक को सपने में इस गुफा का रास्ता बताया था। इससे पहले इस गुफा को च्मेडों खान या घर (चमकादड़ों का निवास) कहते थे कोई भी इस गुफा मैं नहीं जाता था।
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पाताल रुद्रेश्वर
यह गुफा रीठा साहिब से कुछ ही दूरी पर है। एक दिन गाँव एक लड़का अपने गायों को इस गुफा के पास चारा रहा था तो वो उस गुफा के अन्दर गया। किसी गाँव वाले ने उसको उस गुफा मैं जाते देखा तो जब वो बाहर निकला तो उसने पूछा इसके अन्दर क्यों गया तो उस बालक ने बताया मैंने कल रात सपने मैं ये गुफा देखी जैसा मैंने सपने मैं देखा था हकीकत मै वैसी ही गुफा हैं तब उस आदमी ने गाँव वालों को सारी बात बताई।
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lord shiva symbol image
उसी समय गांव के कुछ लोग वहां गए और गुफा के अन्दर जो देखा वो किसी चमत्कार से कम नहीं था। वहां पर तीन छोटी छोटी गुफाएं है जिनमें चमकादड रहते हैं। एक बड़ी गुफा है। गुफा के अन्दर एक छोटा सा कुंड हैं जिसके किनारे पर बैल रुपी सफ़ेद पत्थर की आकृति बनी हैं और कुंड के बीचों बीच सफ़ेद पत्थर का शिव लिंग बना हुवा है।
शिव लिंग के उप्पर प्राकृतिक रूप से पानी की 5 धाराएँ चट्टान से गिरती हैं इस जगह पर गुफा की उचाई ज्यादा नहीं हैं लगभग 5 फिट होगी इस कुंड से 6 मीटर की दूरी पर चट्टान में कान लगाने से एसी आवाज आती हैं जैसे की चट्टान के अन्दर बहुत बड़ी नदी बह रही हो।
गुफा के बारे में जानकारी मिलते ही यहांह लोगों का तांता लग गया। लोगों का मानना है कि इस गुफा में साक्षात शिव के दर्शन होते हैं। ऐसा लगता है कि शिव अब भी यहां तपस्या कर रहे हैं। (बता दें कि यह सभी बातें पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है।)