पिंडदान के लिए भारतवर्ष क्या दुनिया भर से हिंदू भले ही प्रसिद्ध गया पहुंचते हों लेकिन एक तीर्थ ऐसा भी है जहां पर पिंडदान गया से भी आठ गुणा फलदायी है।
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brahmakapal
- फोटो : AmarUjala
यही नहीं इसी तीर्थ स्थल पर भगवान शिव को भी ब्रह्महत्या के पाप से मुक्ति मिली थी। पितृपक्ष शुरू होते ही इस तीर्थ में पितरों के उद्धार के लिए तीर्थयात्रियों के साथ स्थानीय श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचने लगे हैं।
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बद्रीनाथ
- फोटो : amar ujala
चारों धामों में प्रमुख उत्तराखंड के बदरीनाथ के पास स्थित ब्रह्माकपाल के बारे में मान्यता है कि यहां पर पिंडदान करने से पितरों की आत्मा को नरकलोक से मुक्ति मिल जाती है।
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brahmakapal
स्कंद पुराण में ब्रह्मकपाल को गया से आठ गुणा अधिक फलदायी पितरकारक तीर्थ कहा गया है।
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lord brahma
- फोटो : AmarUjala
सृष्टि की उत्पत्ति के समय जब तीन देवों में एक ब्रह्मा मां सरस्वती के रुप पर मोहित हो गए तो भोलेनाथ ने गुस्से में आकर ब्रह्मा के तीन सिरों में से एक को त्रिशूल के काट दिया।
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shiva
- फोटो : AmarUjala
लेकिन ब्रह्या का सिर त्रिशूल पर ही चिपका रह गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शिव पर ब्रह्म हत्या का पाप लग गया था।
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brahmakapal
ब्रह्मा की हत्या के पाप से मुक्ति पाने के लिए जब भोलेनाथ पृथ्वी लोक के भ्रमण पर गए तो बदरीनाथ से पांच सौ मीटर की दूरी पर त्रिशूल से ब्रह्मा का सिर जमीन पर गिर गया तभी से यह स्थान ब्रह्मकपाल के रुप में प्रसिद्ध हुआ।
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pandava
- फोटो : indovacations.net
यही नहीं जब महाभारत के युद्ध में पांडवों ने अपने ही बंधु-बांधवों को मार कर विजय प्राप्त की थी तब उन पर गौत्र हत्या का पाप लगा था।