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देखिए जरा... कुछ कहती हैं ये तस्वीरें

Tue, 15 Apr 2014 11:02 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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भाई जल्दी चलो देरी हो गई... हनुमान जयंती के अवसर शिवाजी धर्मशाला से निकलने वाली शोभा यात्रा में शामिल होने के लिए साईकिल पर जाते बंदर बने कलाकार। फोटो: दिवाकर नेगी।
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भगवान की जितनी जरूरत बड़ों को है उतनी ही बच्चों को भी। हनुमान जयंती के अवसर पर करनपुर स्थित डीएवी चौक के पास हनुमान मन्दिर में पूजा करती बच्ची। फोटो: अनिल डोगरा।
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बहुत जरूरी है मतदान। गांधी पार्क में नुक्कड़ नाटक के जरिए लोगों को यहीं समझा रहे हैं जन संवाद ग्रुप के कलाकार। फोटो: राजीव गुप्ता।

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जहां आजकल शादी के बाद बेटी की विदाई और पुत्र वधू का आगमन लक्जरी गाड़ियों में होता है, वहीं पहाड़ पर बसे इस गांव में बेटी की विदाई और बहू का स्वागत घोड़ी पर होता है। यह परंपरा सदियों से निभाई जा रही है और नई पीढ़ी भी इस परंपरा का निर्वहन कर रही है। (तस्वीर उत्तराखंड में कर्णप्रयाग के देवाल ब्लॉक स्थ‌ित वाण गांव की है।)
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बिडम्बना देख‌िए। एक तरफ स्कूटी पर फर्राटा भरती युवती दूसरी तरफ जिंदगी को बोझ साइकिल पर ढोती वृद्धा। कांवली गांव निवासी 75 वर्षीय हेमंती लगभग घंटो लाइन में लगकर सिलेंडर ले जाती हैं। कभी-कभी तो गैस न मिलने पर वह लकड़ियां भी साथ ढोकर ले जाती है ताकि चूल्हा जल सके। फोटो: राजीव गुप्ता।
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जिंदगी से खिलवाड़- दोहपर 2.30 बजे बुद्धाचौक के पास ऑटो चालक स्कूली बच्चों को किस कदर ठसा-ठस भरकर ले जा रहा है। ऑटो के आगे से सीओ की गाड़ी भी गुजरी मगर ओर किसी का ध्यान नहीं गया। ऐसे में अगर कोई हादसा हो जाए तो कौन जिम्मेदार होगा। फोटो: अनिल डोगरा।
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