मानसून से पहले की बारिश से सोमवार को शहर तालाब में तब्दील हो गया है। जगह-जगह जल भराव के साथ अटे नालों की गंदगी भी सड़कों पर आ गई। नतीजा यह हुआ कि शहर में हर तरफ यातायात प्रभावित हो गया। सबसे ज्यादा दिक्कत पैदल यात्रियों को हुई है।
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उन्हें गंदे पानी से होकर सड़क पार करनी पड़ी। इस दुर्दशा ने नगर निगम के नियमित सफाई के दावों की पोल भी खोल दी है। नगर निगम शहर के नालों की सफाई कराने के दावों में पीछे नहीं है। नाला गैंग के 120 सदस्यों को 10-10 के ग्रुप में निगम इंस्पेक्टरों की अगुवाई में सफाई की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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मानसून से पहले नालों को पूरी तरह साफ करने की बात कही जा रही थी। सोमवार को मानसून की दस्तक से पहले हुई बारिश ने सब कुछ साफ कर दिया। निगम आफिस के बाहर ही सबसे बुरा हाल था। नाले अटे होने के कारण पानी सड़कों पर था। जलभराव के साथ गंदगी के ढेर लग गए।
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इस वजह से यहां सबसे लंबा जाम लगा रहा। तहसील चौक पर तो कई-कई फुट होने के कारण जलभराव के कारण वाहनों का चलना भी मुश्किल हो गया था। घंटाघर, राजपुर रोड, प्रिंस चौक, आढ़त बाजार में सबसे बुरा हाल था। यहां पर सड़कों के पानी में डूब जाने के कारण वाहनों का चलाना भी मुश्किल हो गया था। दिन भर निगम के अधिकारी जल भराव को लेकर जवाब देने से बचते रहे।
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शहर में जलभराव को लेकर शोर-शराबा हुआ तो निगम हरकत में आया। सफाई कर्मचारियों को उन चौराहों पर दौड़ाया गया, जहां सबसे ज्यादा जलभराव होने के कारण यातायात जाम हो गया था। इसी बीच बारिश थमी तो हालात धीरे-धीरे सामान्य होते चले गए।
वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा कैलाश गुंज्याल का कहना है कि नालों की नियमित रुप से सफाई हो रही है। दिक्कत मुख्य मार्गों के नालों की वजह से हुई है। लोक निर्माण विभाग द्वारा बनाए गए यह नाले छोटे होने के साथ बरसों पुराने है, जिसमें थोड़ी बारिश में ही पानी सड़कों पर आ जाता है।