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सेना में महिलाओं को बराबरी का हक दिलाने में हैं इनका बड़ा हाथ, पढ़ें संघर्ष की कहानी

Fri, 24 Jul 2020 01:24 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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अनुपमा जोशी - फोटो : File Photo, social media
सेना में महिलाओं के स्थायी कमीशन के लिए सबसे पहले देहरादून निवासी रिटायर विंग कमांडर अनुपमा जोशी ने आवाज उठाई थी। 17 साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद गुरुवार को सेना के दस विभागों में महिलाओं के स्थायी कमीशन के आदेश जारी हो गए हैं।
 
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अनुपमा जोशी - फोटो : social media
17 फरवरी 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का फैसला सुनाया था। केंद्र सरकार ने आखिरकार गुरुवार को इसे लागू करने का आदेश जारी कर दिया।
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अनुपमा जोशी - फोटो : social media
देहरादून निवासी रिटायर विंग कमांडर अनुपमा जोशी को भले ही रिटायर होने पर उन्हें इसका फायदा नहीं मिला लेकिन, उनकी यह पहल अन्य महिलाओं के लिए काम आई। उन्होंने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया। 

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सेना में महिलओं को स्थायी कमीशन - फोटो : Amar Ujala
अनुपमा जोशी का 1992 में एयर फोर्स में चयन हुआ था। उसके बाद वह अपनी मेहनत के बल पर आगे बढ़ती रहीं। पहले पांच साल की सर्विस के बाद उन्होंने स्थायी कमीशन देने की आवाज उठाई तो उन्हें तीन साल का एक्सटेंशन मिला। फिर तीन साल का एक्सटेंशन मिला।
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Indian Navy - फोटो : Amar Ujala
हर बार टुकड़ों में मिल रहे एक्सटेंशन से वह खिन्न थी। इसके विरोध में उन्होंने 2002 में अपने सीनियर अधिकारियों से लिखित में जवाब मांगा। लेकिन, जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने 2006 में अन्य महिला अधिकारियों के साथ कोर्ट में याचिका दाखिल की।
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भारतीय सेना (महिलाएं) - फोटो : Flickr
कोर्ट ने केस की सुनवाई में नई भर्तियों को स्थायी कमीशन देने का फैसला दिया। लेकिन, सेवारत महिला अधिकारियों का फैसला नहीं हो पाया। अनुपमा 2008 में रिटायर हुईं। उनका संघर्ष जारी रहा। 2010 में कोर्ट के निर्देश पर एयर फोर्स में महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का फैसला आया। सुप्रीम कोर्ट में मामला चलता रहा।
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