पुरातत्व विभाग की अधीक्षक लीला धस्माना ने शुक्रवार को गोरछा गांव से तीन किमी दूर स्थित जंगल में मिली प्राचीन गुफा का निरीक्षण किया। उन्होंने भी माना कि गुफा में मिली आकृतियां प्रथम दृष्टया पांडव कालीन गुफाओं जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने कहा कि रहस्य को स्पष्ट करने के लिए विभाग का साइंस ब्रांच इस पर शोध करेगा।
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longest cave in tiuni
- फोटो : AmarUjala
बीते 22 नवंबर को त्यूनी तहसील के दुर्गम में बसे गोरछा गांव के कुछ लोगों ने गांव से तीन किमी दूर जंगल में एक प्राचीन गुफा खोजी थी। गुफा के अंदर शिवलिंग की कई आकृतियां है। जिस पर लगातार पानी की बूंदे टपकते रहती हैं।
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- फोटो : AmarUjala
खबर को अमर उजाला ने बीती 25 नवंबर यूनी में मिली प्राचीन गुफा बनी कौतहूल शीर्षक से प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसके बाद से गुफा लोगों के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। गुफा करीब 30 मीटर लंबी है। जिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व उपनिरीक्षक ने भी बीते 1 दिसंबर को गुफा का निरीक्षण किया था।
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lakhamandal cave
अधीक्षक लीला धस्माना ने बताया कि गुफा देखने में पांडुकेश्वर में मिली गुफा जैसी है। जांच के बाद ही इस रहस्य से पर्दा उठ सकेगा। उन्होंने ग्रामीणों से गुफा के बारे में जानकारी हासिल की।
पूर्व जिला पंचायत सदस्य विजयपाल रावत, गुमान सिंह, सतीश, मान सिंह, जयदेव, मातवर आदि का कहना है कि गुफा का रहस्य खुलने पर क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाओं का विस्तार हो सकेगा। क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र में शामिल हो सकेगा। निरीक्षण के दौरान वन विभाग के रेंज अधिकारी मेहरबान सिंह बिष्ट भी मौजूद रहे।