उत्तराखंड में युवा पीढ़ी जहां बेरोजगारी का दंश झेल रही है, वहीं, केमर पट्टी के चोपड़िया गांव में किसी भी परिवार का सदस्य बेरोजगार नहीं है। गांव में पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा ने शिक्षा की जो अलख जगाई थी, उसी का नतीजा है कि गांव के हर परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में कार्यरत हैं।
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भिलंगना ब्लॉक में केमर पट्टी के चोपड़िया गांव में 26 परिवारों में 150 की आबादी है। गांव के प्रत्येक परिवार से एक सदस्य शिक्षक जरूर है। गांव के लोगों को शिक्षा की प्रेरणा पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा से मिली। गांव के लोगों का कहना है कि पहले गांव में अधिकतर लोग अशिक्षित ही थे।
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तब बहुगुणा ने 1966-67 में गांव के पास नव जीवन मंडल आश्रम खोल कर गांव के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए प्राथमिक स्कूल खुलवाया। ग्रामीणों ने भी अपने बच्चों को स्कूल भेजना शुरू किया। नतीजतन आज गांव के हर परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में है।
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- फोटो : demo pic
गांव के 26 परिवारों में 53 शिक्षक, तीन सेना और एक वन विभाग में रेंज अधिकारी के पद पर तैनात है। यही नही अधिकांश परिवारों की बहुएं भी शिक्षक हैं, जिससे गांव के एक भी परिवार के किसी भी व्यक्ति ने बाहर का रुख नहीं किया।
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता कुशाल सिंह कोहली ने बताया कि सुंदरलाल बहुगुणा के प्रयास से ही गांव में शिक्षा की अलख जगी है। उन्होंने 1966-67 से 1990 तक गांव में लगातार शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और शराब के दुष्परिणाम के प्रति लोगों को जागरुक किया। इसी का परिणाम है कि गांव के हर परिवार का सदस्य सरकारी सेवा में है।