नोटबंदी के 40वें दिन रविवार को हरिद्वार के अधिकतर एटीएम में कैश न होने के वजह से जनता के सब्र का बांध टूट गया। नोटबंदी के बाद एटीएम से कैश नहीं मिलने पर अब लोगों का सब्र का बांध टूटने लगा है। अभी तक लोग निराश होकर ही एटीएम और बैंकों से लौट रहे थे। लेकिन रविवार को लोगों को गुस्सा फूट पड़ा। कैश नहीं मिलने से नाराज लोगों ने चंद्राचार्य चौक पर शहर के मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया।
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पुलिस के समझाने पर करीब आधा घंटे बाद ही जाम खुल पाया। रविवार को बैंकों में अवकाश था। ऐसे में कैश के लिए लोग एटीएम पर ही निर्भर थे। सभी सरकारी कार्यालयों और औद्योगिक इकाईयों में काम करने वाले लोग कैश के लिए एटीएम का चक्कर काट रहे थे।
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भूपतवाला से लेकर ज्वालापुर, कनखल, मायापुर, भेल, सिडकुल कहीं भी एक भी एटीएम में कैश नहीं था। चंद्राचार्य चौक स्थित विजया बैंक के एटीएम में ही कैश मिल रहा था।
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यहां कैश निकालने वालों की लंबी लाइन लग गई। करीब आधे घंटे में ही एटीएम खराब होने से और कैश निकलना बंद हो गया।
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लाइन में लगे लोगों ने बैंक अधिकारियों को अवगत कराते हुए एटीएम ठीक कराने की मांग की, लेकिन ठीक करने के बजाय एटीएम के शटर डाल दिए गए।
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इससे कई घंटों से लाइन में खड़े लोग भड़क गए। लोगों ने मुख्य मार्ग बंद कर दिया। एक तरफ का मार्ग बंद किए जाने से वाहन दूसरी तरफ से निकलने लगे।
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लोगों ने सड़क को दोनों तरफ से बंद कर दिया और एटीएम चलवाने की मांग करने लगे। करीब आधा घंटा तक सड़क बंद होने पर जाम लगने की सूचना पर ज्वालापुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और जाम खुलवाया।
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जाम लगवाने वालों में विकास कुमार, सद्दाम, अखिलेश, बाबू गोस्वामी, बीमा, जय सिंह, जयपाल, अनिल, अंकित, सन्नी, मेनपाल, बृजपाल, रुपेश वर्मा, अरविंद, अनिल खटाना, वेदपाल आदि शामिल हुए।
शहर के एकमात्र बैंक विजया बैंक के एटीएम में कैश था। लोगों ने पुलिस कर्मियों ने गुहार लगाते हुए एटीएम चलवाने की मांग की। जिस पर पुलिस की मौजूदगी में एटीएम मैकेनिक आया और उसने मशीन की मरम्मत करी। इससे करीब 12.30 बजे एटीएम चला। इसके बाद कैश मिलना शुरू हुआ।