स्वतंत्र रूप से देश की पहली रक्षा मंत्री बनीं निर्मला सीतारमण की इस भगवान में अटूट आस्था है। उनकी दिली ख्वाहिश मौका मिलते ही इस धाम जाकर मत्था टेकने की रहती है।
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- फोटो : file photo
निर्मला सीतारमण भगवान बदरीनाथ पर अटूट आस्था रखतीं हैं। हालांकि 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान 15 दिन उत्तराखंड में रहने के बावजूद वह वहां नहीं जा पाई थीं।
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Nirmala Sitaraman
इसकी वजह, उस वक्त शीतकाल के लिए बदरीनाथ धाम के बंद कपाट थे। 2012 के चुनाव में पार्टी के लिए मीडिया मैनेजमेंट पर निर्मला सीतारमण का खास फोकस रहा था। इस दौरान, उनके अनुशासनप्रिय और कड़क मिजाज के कार्यकर्ताओं को कई बार दर्शन हुए थे। यही नहीं, पहाड़ी व्यंजनों के प्रति उनका खास लगाव भी झलका था।
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अन्ना हजारे
2012 के उत्तराखंड विधानसभा के चुनाव बीजेपी के लिए बेहद अहम थे। पूरे देश में इससे पहले अन्ना हजारे के लोकपाल आंदोलन के कारण भ्रष्टाचार विरोधी माहौल बन चुका था।
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बीसी खंडूड़ी
- फोटो : AmarUjala
राज्य में बीजेपी सत्तासीन थी और सबसे पहले उत्तराखंड ने ही लोकायुक्त बिल पास कर दिया था। बीसी खंडूडी के तौर पर एक ईमानदार चेहरा बीजेपी ने चुनाव में आगे किया था। बीजेपी को सत्ता में वापसी के लिए हाईकमान ने जो रणनीति बनाई थी, उसमें तत्कालीन पार्टी प्रवक्ता निर्मला सीतारमण को उत्तराखंड में मीडिया मैनेजमेंट का खास काम सौंपा गया था। मोदी सरकार में प्रमोशन पाने वाले धर्मेंद्र प्रधान की भी चुनाव में खास भूमिका रखी गई थी।
बीजेपी के मीडिया टीम में शामिल रहे अजेंद्र अजय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने उस वक्त बदरीनाथ के प्रति अपनी अटूट आस्था के बारे में बताया था। उन्होंने ये भी बताया था कि वे कई बार बदरीनाथ धाम के दर्शन कर चुकी हैं। उन्हें चुनाव के दौरान जब पहाड़ी व्यंजन खाने को दिए गए, तो उन्होंने इन्हें काफी पसंद किया था। इन स्थितियों के बीच, निर्मला सीतारमण के रक्षा मंत्री बनने पर उत्तराखंड बीजेपी के कई नेताओं ने खुशी जाहिर की है। उनका मानना है कि उत्तराखंड के मिजाज को जानने वाली महिला नेत्री का रक्षा मंत्री बनना अच्छा कदम रहेगा, क्योंकि उत्तराखंड में सैनिक आबादी काफी अधिक है।