ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहा जाता है। इस बार निर्जला एकादशी गुरुवार के दिन होने से शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिषाचार्य पंडित संतराम के अनुसार, भगवान विष्णु के सबसे प्रिय दिन गुरुवार को निर्जला एकादशी होने से शुभ फल की प्राप्ति होगी।
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यह व्रत जीवन में सर्व समृद्धि देने वाला माना गया है। इस दिन लोग निर्जल व्रत रखकर विधि-विधान से दान करते हैं। वर्ष भर में कुल 24 एकादशी आती हैं, पर निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में श्रेष्ठ माना गया है। इस दिन कुछ उपाय करने से भाग्य का साथ मिलता है।
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कहा जाता है कि निर्जला एकादशी के दिन गंगा स्नान का भी महत्व होता है। गंगा स्नान कर भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाना चाहिए। इससे घर में धनलाभ होता है। खीर के भोग में तुलसी का पत्ता रखकर भोग लगाएंगे तो इससे घर-परिवार में शांति बनी रहती है।
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शास्त्रों में कहा गया है कि पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है। इसलिए निर्जला एकादशी के दिन पीपल के पेड़ में जल अर्पण करना चाहिए। इसलिए ऐसा करने से कर्ज से मुक्ति मिलती है। साथ ही धनलाभ भी होता है।
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भगवान विष्णु को पीले रंग के वस्त्र, फल और अनाज अर्पित करना चाहिए। इस दिन खुद भी पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा के उपरांत इस चीजों को किसी ब्राह्मण को दान देना चाहिए। ऐसा करने से घर में शांति बनी रहती है।
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वैसे तो दान करना शुभ फल देता ही है लेकिन निर्जला एकादशी के दिन किसी गरीब को दान करने से अधिक लाभ होता है। खास तौर पर इस दिन जल का दान करना चाहिए। इस दिन वस्त्र, धन, फल और मिठाई का दान कर सकते हैं। इस दिन सरबत बनाकर लोगों को पिलाने से पुण्य मिलता है।
निर्जला एकादशी के दिन शिव मंदिर जाकर भगवान शिव की पूजा करने से भी भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। इसके साथ ही आपको भगवान को नारियल, बिल्वफल, सीताफल, सुपारी, कोई भी फल आदि का भोग लगाना चाहिए।