ग्रहण काल में स्नान, दान, जप-पाठ, मंत्र एवं स्तोत्र-पाठ, मंत्र सिद्धि, तीर्थस्नान, ध्यान हवन आदि शुभ कार्य करना कल्याणकारी माना जाता है। सूर्यास्त से पहले दान योग्य वस्तुओं को संग्रह करके संकल्प कर लेना चाहिए और ग्रहण समाप्त होने के बाद अगले दिन सूर्योदय के समय स्नान कर ब्राह्मण को दान देना चाहिए।