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उत्तराखंड में अमित शाह के दौरे में ये 'नया चेहरा' छोड़ गया कई सवाल, नेताओं में मची खलबली

Wed, 27 Jun 2018 09:18 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून
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amit shah
उत्तराखंड का दौरा करके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह लौट चुके हैं, लेकिन उनके इस दौरे में कद्दावर नेताओं के बीच मंच पर प्रमुखता से दिखाई दिए एक अपरिचित चेहरे को लेकर सवाल खत्म नहीं हुए हैं। ये चेहरा संगठन के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए भी नया था। उनकी जुबान पर यह सवाल तैर रहा था कि मंच पर दिग्गज नेताओं के साथ विराजमान महिला नेत्री कौन हैं ?
 
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amit shah
उनका उत्तराखंड भाजपा से क्या कनेक्शन है?  अमर उजाला ने सोमवार को इन सवालों के जवाब तलाशे तो पता चला कि वह चेहरा भाजपा की राष्ट्रीय महामंत्री सरोज पांडेय का है, जो राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के उत्तराखंड में दिए गए दिशा-निर्देशों का फॉलोअप करेंगी।
 
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saroj pandey
रविवार को अमित शाह जब उत्तराखंड पहुंचे तो उनके हर कार्यक्रम में पीली साड़ी में सरोज पांडेय प्रमुखता से दिखाई दीं। शाह हरिद्वार में शांतिकुंज के प्रमुख प्रणव पंड्या से भेंट करने गए तो वहां भी सरोज पांडेय मौजूद रहीं। देहरादून में हुई हर प्रमुख बैठक का वह हिस्सा थीं। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को छोड़ दें तो भाजपा के ज्यादातर नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए सरोज एकदम नया चेहरा थीं।

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amit shah in dehradun
इसीलिए उन्हें लेकर उनके बीच कौतूहल था और सवाल ही सवाल थे। मसलन, उन्हें केंद्रीय नेतृत्व द्वारा इतनी तरजीह क्यों दी जा रही है?  पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन के सभी महामंत्रियों को शाह के दौरे का प्रभारी बनाया है, ताकि राज्यों में जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जो दिशा-निर्देश दें, उनका अनुश्रवण और फॉलोअप प्रभारी महामंत्रियों के माध्यम से कराया जा सके। यानी उत्तराखंड में शाह के दिशा-निर्देशों पर कार्रवाई का फीड बैक सरोज पांडेय लेंगी।
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saroj pandey
दूसरी पांत के नेताओं में सरोज पांडेय को करिश्माई नेता के तौर पर देखा जाता है। उनके नाम 10 साल छत्तीसगढ़ (दुर्ग) का महिला मेयर होने का विश्व कीर्तिमान है। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में उनका नाम दर्ज है। छात्र राजनीति से लेकर लोकसभा की सियासत तक में सफलता के मुकाम हासिल करने वाली पांडेय के सांगठनिक कौशल का ही नतीजा था कि मोदी लहर में हारने के बावजूद पार्टी ने उन्हें राज्यसभा में भेजा। महिला मोर्चा की कमान सौंपी और आज वह पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री सरीखे अहम ओहदे पर काबिज हैं। 10 साल मेयर रहने के बाद वह वैशाली से विधायक और दुर्ग लोस की सांसद रहीं। उनकी विधायक और सांसद बनने की तेजी उनके समकालीन नेताओं की ईर्ष्या की वजह भी बनी, जिसकी कीमत उन्हें 2014 के लोस चुनाव में चुकानी पड़ी।
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