कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए अब नाथू ला दर्रे (सिक्किम) से नया वैकल्पिक रूट (मोटर मार्ग) खुलेगा।
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इतिहास बन जाएगा कैलास मानसरोवर का यह रास्ता
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अभी तक कुमाऊं से होकर कैलास मानसरोवर की यात्रा संचालित होती रही है।
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कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए वर्ष 1981 के बाद केवल लिपुलेख पास ही खोला गया है। यह रूट काफी दुर्गम है।
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अभी तक उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से मानसरोवर का एकमात्र रूट था।
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बीते साल जून में आपदा आने के बाद भी 2014 में यात्रियों की संख्या रिकॉर्ड तोड़ (910 यात्री) रही।
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पीएम नरेंद्र मोदी ने वैकल्पिक मार्ग की बात कही थी। नाथू ला दर्रे (सिक्किम) को यात्रा के लिए खोलने पर अब चीन की सहमति से मानसरोवर के मुहाने तक वाहन से पहुंचा जा सकेगा।
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नाथू ला के अगले वर्ष शुरू होने से विशेषतौर पर कुमाऊं की आर्थिक व्यवस्था चरमरा जाएगी। उत्तराखंड सरकार को वैकल्पिक मार्ग पर कड़ा एतराज है।
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मानसरोवर यात्रा सीधे तौर पर तीर्थाटन से जुड़ी हुई है। काठगोदाम से कैलास तक पहुंचने के 22 पड़ाव हैं। इनमें से 10 उत्तराखंड में हैं, जिनसे स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी है।
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कुमाऊं से होकर कैलास मानसरोवर की यात्रा अतीत काल से संचालित होती रही है और इसका धार्मिक महत्व भी है।
1962 में भारत और चीन के बीच संबंध खराब होने के कारण यह यात्रा लंबे समय तक स्थगित रही। 1981 में जब यह यात्रा फिर शुरू हुई तो यात्रा का स्वरूप ही बदल दिया।