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एनडी की अंतिम यात्रा में जुटे भाजपाई-कांग्रेसी, छलके नेता और लोगों के आंसू, तस्वीरें बेहद भावुक

Mon, 22 Oct 2018 08:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
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नारायण दत्त तिवारी के पार्थिव शरीर की एक झलक पाने के लिए सुबह से ही काठगोदाम सर्किट हाउस में लोगों का तांता लग गया। बीजेपी और कांग्रेस के दिग्गज नेता राजनीतिक मतभेद भुलाकर नारायण दत्त तिवारी के अंतिम दर्शनों के लिए पहुंचे। अंतिम दर्शन के दौरान पुलिस के जवानों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शव वाहन के पीछे पैदल चलने वालों के अलावा दोपहिया और कार सवारों की कतार लगी रही।
 
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विकास पुरुष एनडी तिवारी की शव यात्रा सर्किट हाउस से रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट की ओर बढ़ रही थी। बल्यूटी गांव को जाने के लिए बन रहे मार्ग के पास पहुंचते ही बारिश होने लगी।। वर्ष 2006 में तिवारी ने सीएम रहते हुए बल्यूटी गांव जाने के लिए सड़क निर्माण के प्रस्ताव को स्वीकृति दी थी। 
 
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चित्रशिला घाट पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कबीना मंत्री यशपाल आर्य ने तिवारी के पार्थिव शरीर को कंधा दिया। रावत और आर्या सर्किट हाउस से पूर्व सीएम के शव को ले जा रहे वाहन पर ही सवार थे। दोनों चित्रशिला घाट भी साथ ही साथ पहुंचे। वाहन पर पुत्र रोहित शेखर तिवारी, सांसद प्र्रदीप टम्टा, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक रामसिंह कैड़ा, हरेंद्र क्वीरा आदि थे। 
 

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पिंड दान से लेकर गोदान तक की व्यवस्थाएं बल्यूटिया परिवार ने की। पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय एनडी तिवारी के भतीजे संजय बल्यूटिया और दीपक बल्यूटिया भी सर्किट हाउस पहुंच गए। दोनों भाइयों ने अंतिम संस्कार के दौरान होने वाली सारी व्यवस्थाएं कराई। कुछ दिन पूर्व बल्यूटिया की सगी ताई का स्वर्गवास हुआ था। आज दसवां दिन पूरा होने पर परिवार के साथ पहुंचे। 
 
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सर्किट हाउस में प्रोजेक्टर के जरिये एलईडी स्क्रीन पर नारायण दत्त तिवारी के जीवन से जुड़ी स्मृतियों को दिखाया जा रहा था। इनमें एनडी तिवारी का इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, संजय गांधी के साथ चित्र, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के साथ चित्र, पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह तिवारी को शपथ दिलाते, रोहित और उज्ज्वला के साथ जीवन के चित्र, हेमवती नंदन बहुगुणा के साथ आंदोलन की यादें आदि दिखाई जा रही थीं। इन चित्रों के साथ-साथ पीछे से देशभक्ति के गीत बज रहे थे। 
 
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प्रोजेक्टर पर जो भी वीडियो दिखाई जा रही थी उनमें तिवारी जी के जवानी से बुढ़ापे तक के चित्रों का वर्णन था हालांकि इस वीडियो में तिवारी की पहली पत्नी सुशीला तिवारी गायब थीं। एक भी चित्र सुशीला तिवारी का नहीं दिखाई गया था। यह भी चर्चा का विषय बना रहा। चिन्हित राज्य आंदोलनकारी समिति ने पूर्व सीएम तिवारी पर लौकी की माला चढ़ाई। आंदोलनकारियों ने कहा कि तिवारी किसानों के असली नेता थे। तिवारी ने जो सम्मान राज्य आंदोलनकारियों को दिया वो आज तक किसी भी राजनेता ने नहीं दिया। श्रद्धांजलि देने वालों में धीरेंद्र प्रताप, राजेंद्र सिंह बिष्ट, नवीन नैथानी, भुवन जोशी, दिनेश तिवारी, राजेश बिष्ट, हीरा सिंह, हेम, अयोध्या प्रसाद आदि शामिल थे। 
 
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अंतिम दर्शन के दौरान कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य अपनी भावनाएं रोक नहीं पाए और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। जिन एनडी तिवारी को सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव ने भरपूर सम्मान दिया। उन्हीं तिवारी के अंतिम संस्कार में सपाई नदारद रहे। सपा के प्रांतीय पदाधिकारी से लेकर वरिष्ठ नेता तक नदारद रहे। हालांकि बाद में तीन कार्यकर्ता सपा की टोपी पहन कर चित्र शिला घाट पर दिखाई दिये।
 

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एनडी के भतीजे मनीष तिवारी फफक-फफक कर रो पड़े। सीएम नारायण दत्त तिवारी के आखिरी सफर में श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लग गया।  भाबर के साथ-साथ पहाड़ से भी लोग दिवंगत नारायण दत्त तिवारी को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। शवयात्रा के पीछे पैदल चल रहे लोग चर्चा करते सुने गए कि त्याड़ ज्यू कें पहाड़ैकि पीड़ पत्त छी, उनैलि पहाड़क खूब विकास कराछ (तिवारी जी को पहाड़ का दर्द पता था, उन्होंने पहाड़ का बहुत विकास किया)। अंतिम यात्रा में मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री से बड़े बड़े नेता श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे। कई लोग इन नेताओं के साथ ही सेल्फी और फोटो खिंचाने में मस्त रहे।। मौका मिलते ही मोबाइल से क्लिक होती। इसको लेकर नेता परेशान भी हुए लेकिन विरोध नहीं जता सके।

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पूर्व सीएम तिवारी की आयु वर्ग के कई बुजुर्ग भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे थे लेकिन भीड़ में उनकी नहीं चली। ऐसे में इन बुजुर्गों ने घाट पर दूर से ही आंसू बहाकर अपने नेताओं को श्रद्धांजलि दी। बाद में सभी के चले जाने के बाद ये भी चले गए। एक बुजुर्ग ने कहा कि तिवारी अध्याय समाप्त हो गया। पुलिस ने पूर्व सीएम की अंतिम यात्रा के मद्देनजर ट्रैफिक डायवर्ट किया था। फिर भी कई बाइक सवार आ रहे थे। अंतिम यात्रा आने पर पुलिस ने इन बाइक सवारों को सड़क किनारे खड़ा कर दिया। इस पर बाइक सवार परेशान हो गए लेकिन जैसे ही पता चला कि पूर्व सीएम की अंतिम यात्रा है तो उन्होंने तुरंत श्रद्धा से सिर झुका लिया। 
 

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चित्रशिला घाट पर सत्ताधारी बीजेपी और कांग्रेस के नेता पहुंचे थे। ऐसे में जब आम लोगों ने लंबे समय बाद अपने क्षेत्र के नेताओं को देखा तो उम्मीद जाग गई। कुछ तो मौका पाकर नेताजी के बगल में खड़े हो गए और चुपके से क्षेत्र की समस्याओं के समाधान की गुहार भी लगा दी।
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पूरे राजकीय सम्मान से स्व. एनडी तिवारी का अंतिम संस्कार किया गया। पूर्व सीएम नारायण दत्त तिवारी को श्रद्धांजलि देने चित्रशिला घाट पहुंचे लोगों के लिए आलू के गुटके, छोले और चाय की व्यवस्था की गई थी। दुकान स्वामी भावेश गिरी ने बताया कि करीब चार क्विंटल आलू के गुटके बांटे गए।
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