एनसीईआरटी की किताबों के विद्यालयों में अनिवार्य होने के बाद अभिभावकों के सामने एक और परेशानी खड़ी हो गई है।
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एससी के फैसले के बाद भी अब बाजार में किताबें ही नहीं मिल रही हैं। नवीन शिक्षण सत्र शुरू हुए एक माह होने वाला है लेकिन एनसीईआरटी की गणित, हिंदी, संस्कृत और भूगोल विषयों की किताबें अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हो पाई हैं।
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वहीं कई निजी विद्यालयों में अभी भी विद्यालय संचालकों की ओर से निजी प्रकाशकों की किताबों से ही पढ़ाई कराई जता रही है, जिससे छात्रों को वार्षिक परीक्षा में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अभिभावक ओम प्रकाश नेगी, महेंद्र रावत और मनोज सिंह का कहना है एक माह से विद्यालयों में पठन-पाठन कार्य शुरू हो गया है।
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लेकिन दुकानों में किताबें उपलब्ध न होने से बच्चों को पढ़ाई में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुस्तक विक्रेता पीयूष विश्नोई और महानंद बिष्ट का कहना है कि एडवांस बुकिंग के बावजूद मांग के सापेक्ष किताबें नहीं मिल पा रही हैं।
कुछ किताबों का अभी तक प्रकाशन भी नहीं हुआ है। इधर मुख्य शिक्षा अधिकारी ललित मोहन चमोला का कहना है कि किताबों की कमी शीघ्र पूरी हो जाएगी। उच्च अधिकारियों से इस संबंध में वार्ता की गई है। जिन विद्यालयों में अभी भी निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जा रही हैं, उसकी खंड शिक्षा अधिकारी से जांच करवाई जाएगी।