भारत की विश्वप्रसिद्ध और बेहद खूबसूरत झील पर भूकंप का खतरा मंडरा रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर ध्यान नहीं दिया तो इसका पानी अचानक गायब हो जाएगा। आगे जानिए...
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भूकंप
स्कंद पुराण में त्रिऋषि सरोवर के नाम से वर्णित विश्व विख्यात पर्यटन स्थल नैनी झील का पानी अचानक गायब हो सकता है। हिमालयी क्षेत्र में मंडरा रहे भूकंप के खतरे के मद्देनजर विज्ञानियों ने आगाह किया है कि झील के भूकंपीय जोड़ की सक्रियता का तत्काल आकलन किया जाए।
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naini lake
इस जोड़ की दरार फैली तो पानी भूगर्भ में समा जाएगा। नैनी झील भूकंपीय जोड़ पर बनी है। इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने घोषणा की है कि ‘हिल साइड सेफ्टी कमेटी’ को फिर से जीवित किया जाएगा। यह कमेटी वर्ष 1930 में बनी थी, इसके बाद इसका अस्तित्व समाप्त हो गया।
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trivendra
संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के बैनर तले राजभवन में ‘साइंटिफिक एंड टेक्नोलोजिकल इंटरवेंशन टु सेव नैनी लेक’ विषय पर आयोजित कार्यशाला में विज्ञानियों ने कहा कि तत्काल नैनी झील का मौजूदा स्टेटस पता कराया जाए। नैनीताल क्षेत्र का तापमान दो से तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ गया है।
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hnbgu
नैनी झील का पानी 18 फिट कम हो गया। एचएनबी विवि के पूर्व कुलपति प्रोफेसर एसपी सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि अभी इस पर कोई नोटिस नहीं ले रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ‘हिल साइड सेफ्टी कमेटी’ को फिर से जीवित करने की घोषणा की।
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trivendra
यह कमेटी वर्ष 1930 में ब्रितानी हुकूमत के दौरान पहाड़ों पर भूस्खलन, झीलों, झरनों की मॉनीटरिंग के लिए बनाई गई थी, लेकिन बाद में समाप्त हो गई। इस मौके पर सूखा ताल चर्चा का विषय रहा है। इसके साथ ही विज्ञानियों ने झरनों के सूखने पर चिंता जताई। इन झरनों से भी नैनी झील रिचार्ज होती है।
विज्ञानियों ने एक स्वर में चेताया कि तलझट हटाने के नाम पर नैनी झील के तल पर ड्रेजिंग कतई न कराई जाए। यह भूकंपीय प्लेटों पर बनी है। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन और बारिश के पानी को सहेजने का मशविरा दिया गया। झील के कैचमेंट एरिया की जूलोजिकल अध्ययन कराने का मशविरा दिया गया।