उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र के अन्तर्गत अनेक सुरम्य ऐतिहासिक स्थल हैं जिनकी जितनी खोज की जाय उतने ही रहस्य सामने आ जाते हैं। इन आकर्षक एवं मनमोहक स्थलों को देखने के लिये प्राचीन काल से वैज्ञानिक, इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ताओं, भूगर्भ विशेषज्ञों एवं जिज्ञासु पर्यटकों के क़दम इन स्थानों में पड़ते रहे हैं।
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आज हम जिस झील के बारे में आपको बता रहे हैं वह सदियों से नर कंकालों से भरी हुई है। लेकिन इसका रहस्य आज तक कोई नहीं जान पाया। यह झील बागेश्वर से सटे चमोली जनपद में बेदनी बुग्याल के निकट स्थित है।
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उत्तराखंड के उत्तर में हिमालय की अनेक चोटियों के बीच त्रिशूल की तीन चोटियां हैं। ये चोटियां गढ़वाल इलाके के चमोली ज़िले व कुमाऊँ इलाके के बागेश्वर ज़िले की सीमा पर स्थित हैं।
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भगवान शिव का त्रिशूल माने जाने वाले हिमश्रंग त्रिशूल चोटी के बगल में ही रूपकुंड है। समुद्रतल से 4778 मीटर की ऊंचाई पर और नन्दाघुंटी शिखर की तलहटी पर स्थित रूपकुंड झील सदैव बर्फ़ की परतों से ढकी रहती है।
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अतः इसे 'हिमानी झील' कहते हैं। रूपकुंड भारत के दस सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। एक ऐसा रहस्य जो सदियों से सुलझाया नहीं जा सका है।
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उत्तराखंड में 5 हजार मीटर से भी ज्यादा की ऊंचाई पर बर्फ से घिरी यह झील अनगिनत कथाएं और रहस्य समेटे हुए है। ये झील 200 से ज्यादा नरकंकालों से भरी हुई है।
आसपास की बर्फ में भी दबी हैं अनगिनत हड्डियां। उस इलाके में नरकंकाल 10 फीट लंबे हैं, आखिर इतने लंबे इंसान कौन थे, आखिर इतनी सारे नरकंकाल इतनी ऊंचाई पर कैसे आजतक दफन हैं। जानकारों के मुताबिक वहां 13 नंबर तक की बड़ी चप्पल मिली हैं।