नवरात्रों में देवी के इस मंदिर में आगर मुराद मांगने से कोई भी खाली हाथ नही जाता है। यहां एक चमत्कारी वृक्ष है। जिस पर नवरात्रों में अगर सच्चे मन से डोरी बांधी जाए तो हर मनोकामना पूरी होती है।
विज्ञापन
2 of 7
mansa devi
- फोटो : demo
हरिद्वार स्थित मां मनसा देवी सबकी मनोकामना पूरी करने वाली हैं। मां मनसा को भगवान शिव की मानस पुत्री के रूप में पूजा जाता है। इनके पति जगत्कारु तथा पुत्र आस्तिक हैं। इन्हें नागराज वासुकी की बहन के रूप में भी पूजा जाता है। मंसा देवी के दर्शन के साथ यहां मौजूद स्नोही वृक्ष पर डोरी बांधने की भी परंपरा भी चली आ रही है। कहते हैं कि इस वृक्ष पर डोरी बांधने से मनोकामना पूरी हो जाती है।
विज्ञापन
3 of 7
mansa devi
- फोटो : demo
चैत्र व शारदीय नवरात्र में मां मंसा देवी मंदिर में मां मंसा की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही सुबह-शाम मां की आरती भी होती है। मंदिर में सुबह से शाम तक रोजाना हजारों भक्त मां के दर्शन कर आशीर्वाद लेते हैं।
4 of 7
mansa devi temple
मंसा देवी मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण में भी आता है। इसमें मंसा देवी को दसवीं देवी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि एक बार जब महिसासुर नामक राक्षस ने देवताओं को पराजित कर दिया। इसके बाद देवताओं ने देवी का स्मरण किया और देवी ने प्रकट होकर महिषासुर नामक राक्षस का वध कर दिया।
विज्ञापन
5 of 7
Mata Mansa Devi, Panchkula
इस पर देवताओं ने देवी की पूजा अर्चना की और देवी से कहा कि हे देवी जिस प्रकाश आपने हमारी मंसा को पूरा किया इसी प्रकार कलियुग में भी भक्तों की मंसा को पूरा कर उनकी विपत्ति को दूर करें। कहते हैं कि इस पर देवी ने हरिद्वार के शिवालिक मालाओं के मुख्य शिखर के पास ही विश्राम किया गया और इसी कारण से यहां मंसा देवी मंदिर की स्थापना हुई।
विज्ञापन
6 of 7
mansa devi temple
मां मनसा देवी के मंदिर का मार्ग हरिद्वार स्थित हरकी पैड़ी से होकर जाता है। यहां मां ऊंचे पहाड़ पर विराजमान हैं। मां के सात नामों के जाप से सर्प का भय नहीं रहता। ये नाम इस प्रकार है जरत्कारू, जगतगौरी, मनसा, सियोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जगतकारुप्रिया, आस्तिकमाता और विषहरी।
मंदिर की स्थापना के दौरान इसे आम भारतीय मंदिरों की तरह की बनाया गया। इसमें किसी विशेष वास्तुकला का नमूना नहीं है। कहते हैं कि इसे दक्षिण भारत के मंदिरों की नकल के आधार पर बनाया गया। मंदिर परिसर में वर्षों पुराना स्नोही वृक्ष भी है। हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंसा देवी मंदिर का दर्शन कर इस वृक्ष पर डोरी भी बांधते हैं।