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अनोखी मिसाल: मुस्लिम पिता के आंगन से धूमधाम से निकली हिंदू बेटे की बारात

Wed, 14 Feb 2018 09:29 AM IST
अनिल चन्दोला, अमर उजाला, देहरादून
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marriage
धर्म के नाम पर एक-दूसरे का खून बहाने वालों के लिए मोइनुद्दीन और राकेश रस्तोगी की कहानी आंखें खोलने वाली है। 12 साल के मासूम अनाथ को एक मुस्लिम परिवार ने न केवल अपनाया, बल्कि उसे बेटे का प्यार भी दिया। हिंदू रीति-रिवाज के साथ अपने घर से उसकी बारात निकाली और देर शाम उसी अंदाज में बेटे और बहू का स्वागत भी किया। मोइनुद्दीन का पूरा परिवार घर में नई बहू की आमद से खासा खुश है।
 
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marriage - फोटो : amar ujala
मुन्ना लाल रस्तोगी अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ गांधी ग्राम में रहते थे। करीब 17 वर्ष पहले उनकी पत्नी की मौत हो गई। इससे वह पूरी तरह टूट गए और अक्सर बीमार रहने लगे। जिंदगी के अंतिम समय में उन्होंने घर बेच दिया और उससे जमा रकम बेटी की शादी के लिए बड़े भाई को दे दी। कुछ समय बाद ही उनकी मौत हो गई और दोनों बच्चे ऋतु और राकेश अनाथ हो गए। चाचा-चाची ने एक साल बाद ऋतु की शादी लकड़ी का काम करने वाले देवेंद्र से करवा दी। 12 साल का राकेश अकेला रह गया। तब सिंघल मंडी निवासी मोइनुद्दीन और उनकी पत्नी कौसर जहां ने राकेश को अपने घर में जगह दी। उन्होंने राकेश को अपनी चार संतानों की तरह माता-पिता का प्यार दिया। राकेश भी पिता के साथ मंडी के काम में हाथ बंटाते। धीरे-धीरे राकेश इस परिवार का अटूट हिस्सा बन गए। 

 
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marriage line
करीब 12 वर्ष बीतने के बाद मोइनुद्दीन को लगा कि अब राकेश की शादी करवा देनी चाहिए। नौका चौक, मोथरोवाला के चौहान परिवार के पास रिश्ता गया तो उन्होंने झट से हां कर दी। शुक्रवार को राकेश और सोनी की शादी का मौका आ गया। सुबह मोइनुद्दीन के घर पर राकेश की बड़ी बहन ऋतु और आस-पड़ोस के लोगों ने हल्दी की रस्म निभाई। इसके बाद धूमधाम से बारात निकाली गई। मोथरोवाला में पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ राकेश और सोनी ने एक-दूसरे को जयमाल पहनाई और जन्म-जन्मांतर तक साथ निभाने का वादा किया। शाम को मोइनुद्दीन बेटे और नई बहू के साथ घर पहुंचे तो पूरे परिवार ने उनका स्वागत किया। इस मौके को खास बनाने के लिए मोइनुद्दीन के कई रिश्तेदार और आस-पास के लोग भी घर पहुंचे।
 

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kejriwal diwali
कभी नहीं लगा मेरे मां-बाप नहीं हैं
राकेश ने बताया कि मोइनुद्दीन और कौसर जहां ने उन्हें हमेशा मां-बाप का प्यार दिया। उन्हें कभी नहीं लगा कि वह अनाथ हैं। परिवार में उन्हेें मां-बाप, भाई-बहन सबका प्यार मिलता है। राकेश ने बताया कि वह शाकाहारी हैं। जब अन्य लोगों के लिए मांसाहारी खाना बनता है तो उनके लिए पहले अलग खाना बनाया जाता है। उन्होंने अपने कमरे में मंदिर बनाया है, जहां वह पूजा भी करते हैं। दीपावली पर पूरे परिवार के साथ घर में दिये जलाते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें कभी नहीं लगा कि वह किसी दूसरे धर्म के लोगों के साथ रहते हैं। उन्हें अपना धर्म मानने और अपनी तरह जीने की पूरी छूट दी गई।
 
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Muslim youth - फोटो : File Photo
कई बार दुश्मन बना समाज  
एक हिंदू लड़के को घर में रखने पर कई बार मोइनुद्दीन को विरोध भी सहना पड़ा, लेकिन उन्होंने और राकेश ने कभी इसकी परवाह नहीं की। मोइनुद्दीन ने बताया कि आस-पास सभी परिवार हिंदू हैं, लेकिन उनसे कभी दिक्कत नहीं हुई। जब राकेश की बारात लेकर पहुंचे तो वहां भी कई लोगों ने कहा कि लड़का मुस्लिमों के साथ रहता है। हिंदू रीति-रिवाज से शादी हुई तो उनकी शंका दूर हुई। उन्होंने बताया कि अपने घर में मेहंदी और हल्दी की रस्म और हिंदू लड़के की शादी कराने से पहले उन्होंने आलिमों से मशविरा किया। उन्होंने भी मोइनुद्दीन के रवैये की तारीफ की। राकेश और सोनी की शादी की दावत 11 फरवरी को घर के पास में ही रखी गई है। परिवार के नजदीकी इरशाद ने बताया कि शादी में राकेश और सोनी के रिश्तेदारों के साथ ही मोइनुद्दीन ने भी अपने रिश्तेदारों और जानने वालों को बुलाया है। साथ ही मोहल्ले के सभी लोगों को भी बुलाया गया है।
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