दसवीं मुहर्रम पर यहां चारों ओर या हुसैन की सदाएं गूजंती रही। इसके खुदा के बंदों की बानगी ही कहेंगे कि यहां हाथों में तिरंगा लेकर मुहर्रम का जुलूस निकाला गया।
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Muharram 2018
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में शुक्रवार को ताजियों का जुलूस निकाला गया। इस दौरान करगिल लद्दाख स्टूडेंट यूनियन ने लोगों को साफ सफाई कर स्वच्छता का संदेश भी दिया। जुलूस के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।
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अंजुमन मोईनुल मोमिनीन की ओर से कर्बला में शहीद इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में जुलूस दोपहर दो बजे से 7 ईसी रोड स्थित इमामबाड़े से शुरू हुआ। जुलूस में बच्चे और बड़े तिरंगे और ईराक से आए अलम परचम को लेकर चल रहे थे।
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इसके अलावा सोगवारों ने या हुसैन या हुसैन सदाओं के साथ अपने आप को चाकू और छूरियों से लहूलुहान कर लिया। जुलूस सर्वे चौक, तिब्बती मार्केट, बुद्धा चौक, तहसील चौक होते हुए 36 गांधी रोड पर खत्म हुआ।
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मौलाना मोहम्मद अनीस आब्दी और मौलाना असगर अली ने बताया कि कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने इस्लाम को बचाने के लिए अपनी शहादत दे दी थी। हमें उनकी शहादत का गम मनाना चाहिए।
उससे जुल्मी ताकतों का डटकर सामना करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। हसन जैदी ने कहा कि मुहर्रम गम का त्यौहार है। इस दिन समुदाय के लोग भूखे रह कर इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत की याद में मातम मनाते हैं।