फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दुनियाभर के वैज्ञानिकों को अपनी ओर खींच रहा है देवी मां के इस मंदिर का तेज

Thu, 21 Sep 2017 08:10 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
1 of 6
kasar devi temple
नवरात्र शुरु होने से पहले आइए जानते हैं माता के इस मंदिर के बारे में जिसके तेज ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों का ध्यान खींच रखा है। नासा के वैज्ञानिक इस जगह के चार्ज होने के कारणों और प्रभावों पर शोध कर रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 6
kasar devi temple
पर्यावरणविद डॉक्टर अजय रावत ने भी लंबे समय तक इस पर शोध किया है। उन्होंने बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास वाला पूरा क्षेत्र वैन एलेन बेल्ट है, जहां धरती के भीतर विशाल भू-चुंबकीय पिंड है। इस पिंड में विद्युतीय चार्ज कणों की परत होती है जिसे रेडिएशन भी कह सकते हैं।


 
विज्ञापन

3 of 6
kasardevi temple
पिछले दो साल से नासा के वैज्ञानिक इस बैल्ट के बनने के कारणों को जानने में जुटे हैं। इस वैज्ञानिक अध्ययन में यह भी पता लगाया जा रहा है कि मानव मस्तिष्क या प्रकृति पर इस चुंबकीय पिंड का क्या असर पड़ता है। अब तक हुए इस अध्ययन में पाया गया है कि अल्मोड़ा स्थित कसारदेवी मंदिर और दक्षिण अमेरिका के पेरू स्थित माचू-पिच्चू व इंग्लैंड के स्टोन हेंग में अद्भुत समानताएं हैं।


 

4 of 6
kasardevi temple
इन तीनों जगहों पर चुंबकीय शक्ति का विशेष पुंज है। डॉ. रावत ने भी अपने शोध में इन तीनों स्थलों को चुंबकीय रूप से चार्ज पाया है। उन्होंने बताया कि कसारदेवी मंदिर के आसपास भी इस तरह की शक्ति निहित है।


 
विज्ञापन

5 of 6
kasardevi temple
स्वामी विवेकानंद ने 1890 में ध्यान के लिए कुछ महीनों के लिए आए थे। बताया जाता है कि अल्मोड़ा से करीब 22 किमी दूर काकड़ीघाट में उन्हें विशेष ज्ञान की अनुभूति हुई थी। इसी तरह बौद्ध गुरु लामा अंगरिका गोविंदा ने गुफा में रहकर विशेष साधना की थी। हर साल इंग्लैंड से और अन्य देशों से अब भी शांति प्राप्ति के लिए सैलानी यहां आकर कुछ माह तक ठहरते हैं।


 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
ध्‍यान
दुनिया के 3 स्थलों की विशेषताएं
कसारदेवी मंदिर, अल्मोड़ा (भारत) - अल्मोड़ा से 10 किमी दूर अल्मोड़ा-बिंसर मार्ग पर स्थित कसारदेवी के आसपास पाषाण युग के अवशेष मिलते हैं। अनूठी मानसिक शांति मिलने के कारण यहां देश विदेश से कई पर्यटक आते हैं।
माचू-पिच्चू, पेरू (अमेरिका) - यहां इंका सभ्यता के अवशेष मिले हैं जो उस वक्त एक धार्मिक नगरी थी। 11वीं शताब्दी में वहां वेधशाला भी थी। यहां ऊपर पहाड़ी से नीचे देखने पर एक लम्बी लाइन दिखाई देती है, जबकि नीचे पहुंचने पर ऐसा कुछ नहीं पाया जाता है।
स्टोन हैंग स्मारक, विल्टशायर (इंग्लैंड) - वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स की सूची में शामिल यह स्मारक दुनिया के सात आश्चर्यों में शुमार है। यहां भी प्रागैतिहासिक काल के प्रमाण देखे जा सकते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें