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उत्तराखंडः पहाड़ पर बंदर हुए खतरनाक, 300 लोगों को किया घायल

Fri, 02 Sep 2016 03:50 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गढ़वाल
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बंदरों को मारने वालों को हिमाचल सरकार अब इनाम देगी। - फोटो : अमर उजाला
हिमाचल प्रदेश सरकार के बंदरों को मारने वालों के लिए इनाम घोषित किए जाने के बाद उत्तराखंड में भी बंदर उन्मूलन योजना शुरू किए जाने के लिए आवाज उठी है। गढ़वाल के पर्वतीय जिलों में पिछले तीन-चार वर्षों से बंदरों का उत्पात बढ़ा है।
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बंदर - फोटो : अमर उजाला
खेती को तहस-नहस करने के साथ ही बंदर मानव पर भी हमला बोल रहे हैं। चमोली जिला बंदरों से सर्वाधिक त्रस्त रहा है। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के अधिकारियों की मानें तो चमोली जिले में पांच वर्षों में करीब 300 लोगों को बंदर घायल कर चुके हैं। रुद्रप्रयाग जिले के अगस्त्यमुनि के सिल्ला गांव में वर्ष 2013 में घर के आंगन में सो रखे बच्चे को बंदर उठा कर खेतों में ले गए थे। करीब चार घंटे तक बंदरों ने मासूम को घेरे रखा। यही नहीं बंदर खेती के बड़े दुश्मन बन गए हैं। तमाम स्थानों में बंदरों से भयभीत होकर लोगों ने खेती करनी ही छोड़ दी है। सिंचित खेत बंजर हो गए हैं।
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बंदर
चमोली जिले में पीपलकोटी, चमोली बाजार, गोपेश्वर, पोखरी और नंदप्रयाग क्षेत्र में बंदरों का आतंक बना हुआ है। पिछले पांच सालों में बंदर जनपद में करीब तीन सौ लोगों पर हमला कर उन्हें घायल कर चुके हैं। पीपलकोटी में मां दुर्गा और हनुमान मंदिर में बंदर झपट्टा मार लोगों के हाथों से प्रसाद की थाली छीन लेते हैं, इससे बचने के लिए लोग हाथ में डंडा लेकर मंदिरों में पहुंच रहे हैं। चमोली बाजार में बंदर स्कूल जाते कई बच्चों पर हमला कर चुके हैं। पिछले दिनों ही यहां एक बच्चे पर हमला कर बंदर उसे घायल कर चुका है।

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चंपावत के कई इलाकों में बंदरों की दहशत - फोटो : अमर उजाला
जनपद में बंदरों, सुअरों के झुंड फसलों को चौपट कर रहे हैं। पौड़ी शहर से लगे गांवों, विकासखंड कल्जीखाल, थलीसैंण, पाबौ समेत जिलेभर में किसान बंदरों और सुअरों से परेशान हैं। पाबौ ब्लॉक के बालीकंडारस्यू, विडोलस्यू, घुड़दौड़स्यूपट्टी, चोपड़यू, मिलई, कोठला, सैंजी, निसणी, रतकोटी, बड़सुडी, सुन्द्रयो गांव के किसानों का कहना है कि सुअरों और बंदरों के झुंड खेतों में घुस आते हैं और उनकी फसलों को चौपट कर रहे हैं। काश्तकारों ने फसलों की रखवाली के लिए चौकीदार रखा हुआ है।
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monkey
पौड़ी और टिहरी जिले के दर्जनों गांव और शहरी क्षेत्र के लोग बंदर और लंगूरों के उत्पात से परेशान हैं। बंदरों की  टोली जहां उनके फसलों, फलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाती है, वहीं कटखन्ने बंदर कई लोगों को काट भी चुुके हैं। मंदिरों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं से छीनाझपटी करते है। धारी देवी मंदिर में बंदर श्रद्धालुओं के हाथ से थैलियां खींचकर भाग जाते हैं। विरोध करने पर बंदर काटने को तैयार रहते हैं। गर्मियों के दिनों में बंदर छतों में स्थापित पानी की टंकियों को तोड़कर पानी में नहाते हैं।
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देवप्रयाग और कीर्तिनगर नगर क्षेत्र में बंदरों के उत्पात से लोग परेशान हैं। देवप्रयाग में बंदर स्कूली बच्चों को रास्ता रोक देते हैं, लिहाजा अभिभावकों को साथ में चलना पड़ता है। बंदर दुकानों से सामान उठा ले जाते हैं। शहरी क्षेत्रों में शायद ही ऐसा कोई घर होगा, जिसकी छत की रेलिंग सही सलामत हो। बंदरों ने हिला-हिलाकर रेलिंग तोड़ डाली हैं। कीर्तिनगर में पिछले साल बंदरों ने तीन बच्चे काट दिए थे। इसके बाद वन विभाग की टीम ने 31 बंदर पकड़े थे, लेकिन कुछ माह बाद यहां दोबारा से बंदर आ गए। डुंगरीपंथ, मलेथा, रानीहाट, डांगचौरा, चौरास, सेंद्री, बैजवाणी, जाखी, गवाणा और बडियारगड़ सहित अन्य क्षेत्रों में बंदर फसलों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
नैनबाग क्षेत्र के कई गांवों में बंदरों का उत्पात इस कदर बढ़ गया है कि लोग पका हुआ भोजन तक नहीं कर पाते। बंदर लोगों के किचन तक पहुंच जाते हैं और लोगों के हाथ से छीनकर और टोकरी से रोटियां उठाकर ले जाते हैं।  
टिहरी जिले का शायद ही कोई ऐसा इलाका हो जो बंदरों के आतंक से ग्रस्त नहीं हो। बंदरों की अधिकता के कारण गांवों का सुख चैन खो चुका है। कई लोगों ने बंदरों के डर से खेती-बाड़ी तक छोड़ दी है, असिंचित ही नहीं तराई वाली भूमि भी बंजर हो गई है, मगर वन विभाग के पास इन्हें जंगलों में रोके रखने की कोई योजना नहीं है।

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दुगड्डा और द्वारीखाल के गांवों में बंदर और सुअरों ने काश्तकारों की फसल चौपट कर दी है। दुगड्डा विकासखंड के भेड़गांव, बागी छोटी, मोहनी, अकरी, सकरी, पुजारी, कठूड़, कठूड़ बड़ा, जुगडासौड़, जुगडा रौडियाल, सिमलखेत, धरगांव और सौंटियालधार, द्वारीखाल ब्लाक के बड़ेथ, कड़ासू और उडियारी गांवों में इन दिनों मक्का, झंगोरा, मंडुआ, दाल, तिलहन फसलें लहलहा रही हैं, लेकिन इन फसलों को बंदरों और सुअरों से बचाना मुश्किल हो गया है। उगी फसल वन्यजीवों ने चौपट कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि खेती बचाने के लिए अधिकारी और राजनेता भाषण तो लंबे-चौड़े दे रहे हैं, लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं हो रहा है। लोगों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर वे अपनी सालभर की मेहनत को कैसे बचाएं।

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उत्तरकाशी जनपद के नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र तक बंदरों के उत्पात से ग्रामीण काफी भयभीत है। यहां बंदर फसलों को नुकसान पहुंचाने के साथ साथ भटवाड़ी, डुंडा, लदाड़ी और ज्ञानसू में एक दर्जन से अधिक महिलाओं और बच्चों पर हमला कर घायल कर चुके हैं। जिले में आबादी वाले हिस्से बंदरों से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं।
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रुद्रप्रयाग में पिछले दो-तीन वर्षों से जिले में बंदरों का उत्पात बढ़ा है। अगस्त्यमुनि के सिल्ला, सिनघाटा, डांगी, डडोली, कोटी सहित धनपुर, रानीगढ़ और बच्छणस्यूं पट्टी में बंदरों का उत्पात बना हुआ है। जखोली और ऊखीमठ तहसील क्षेत्र में भी यही स्थिति है। दस दिन पूर्व चंद्रापुरी क्षेत्र के नैली गांव में मंदिर जा रही एक महिला को बंदरों ने नोच कर बुरी तरह से घायल कर दिया था। सिल्ला गांव में सात दिन पूर्व महिला को बंदर ने झपटा मारकर घायल किया था। बीते वर्ष नवंबर में बंदरों को भगाने के दौरान एक व्यक्ति की मौत भी हो गई थी। एक वर्ष में बंदर स्कूली बच्चों और बुजुर्ग को मिलाकर 15 लोगों का लहूलुहान कर चुके हैं। मार्च से वन विभाग द्वारा जिले में 574 बंदर पकड़े जा चुके हैं। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ राजीव धीमान का कहना है कि बंदरों को पकडने का अभियान जारी है।
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