उनके विद्यालय के छात्र रहे बृजेश सती कहते हैं, जब मैं पांचवीं कक्षा का विद्यार्थी था, तब निशंक जी स्कूल के प्रधानाचार्य थे।’ अध्यापन कार्य के दौरान निशंक समाज सेवा और सक्रिय राजनीति से जुड़ गए। राजनीति में उनके कदम जमें तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।