कालेधन के प्रचलन पर रोक और नकली नोटों पर लगाम लगाने के लिए बड़े नोटों को बंद करने का फैसला केंद्र सरकार को भी कुछ सस्ता नहीं पड़ने वाला है।
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money
जानकारों के मुताबिक देश भर में पांच सौ और हजार रुपये के कुल 2500 हजार करोड़ से ज्यादा के नोटों को वापस लिया जाएगा और इनकी जगह नई करेंसी फ्लो की जाएगी। नए नोटों को छापने का खर्च प्रति नोट औसत लगभग चार रुपये है। इस हिसाब से लगभग आठ हजार करोड़ से ज्यादा का खर्च सरकार को झेलना पड़ेगा।
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modi
मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए पांच सौ और हजार के नोटों को बंद करने का फैसला लिया था। दो दिन बाद नए नोटों से इन्हें बदले जाने की बात भी उन्होंने कही। इसके पीछे सीमा पार से हो रही नकली नोटों की सप्लाई के अलावा कालेधन पर लगाम लगाने का तर्क दिया गया। इस सूचना के बाद से पूरे देश में खलबली मच गई।
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RBI
आम आदमी को इस फैसले से समस्या तो हो रही है लेकिन इस फैसले से वह खुश भी है। आरबीआई के एक अधिकारी की मानें तो दो हजार के और पांच सौ के जो नोट छपकर वितरित किए जा रहे हैं, उनका औसत खर्च लगभग चार रुपये है।
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पीएम मोदी
- फोटो : social media
देश भर में करीब ढाई हजार करोड़ से ज्यादा नोट हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री के आदेश के बाद बदलना पड़ेगा। ऐसे में कम से कम दो हजार करोड़ नोट बाजार में झोंकने पड़ेंगे।
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2000 rupee note
यह संख्या बदले जाने वाले नोटों से कम इसलिए है, क्योंकि अब हजार की जगह दो हजार का नोट प्रचलित होगा। इस तरह सरकार को करीब आठ हजार करोड़ रुपये का झटका लगेगा। हालांकि नए नोटों को सिक्योरिटी फीचर्स के लिहाज से और मजबूत किया गया है, जिससे हाल-फिलहाल नकली करेंसी छापना मुमकिन नहीं होगा।
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income tax
- फोटो : income tax
आयकर विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अधिक संख्या में नोट बदलने वाले अपने आप आयकर विभाग के राडार पर आ जाएंगे। नोट बदलते वक्त अपनी आईडी दर्शानी होगी, जिससे मिलान करके अधिसंख्य नोट बदलने वालों से श्रोत पूछा जाएगा। इसके अलावा खातों में नकद जमा करने की सीमा है।
यदि उससे अधिक पैसा खाते में गया तो बैंक से सूचनाओं को साझा करने का तंत्र पहले ही सक्रिय है, जिसके जरिए भी नोटिस देकर पैसों का श्रोत पूछा जाएगा। एक अनुमान के मुताबिक देश के भीतर बड़े नोटों की शक्ल में लगभग एक लाख करोड़ की रकम है, जो कालेधन के रूप में है। यदि इसका पचास फीसदी भी विभाग पकड़ने में कामयाब हो जाता है तो कम से कम बीस से पच्चीस हजार करोड़ की रकम राजस्व के तौर पर मिलेगी।