उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सिग्नल मजबूत करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के मोबाइल टावर गली-गली घूम रह हैं। शिमला बाईपास चौक के पास पांच मिनट पहले तक जहां कुछ नहीं था, वहां एकाएक मोबाइल टावर खड़ा हो गया। जब तक लोग माजरा समझ पाते कि मोबाइल टावर गायब हो गया।
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सिग्नल मजबूत करने के लिए गली-गली घूम रहे मोबाइल टावर
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mobile tower on wheels in dehradun
- फोटो : concept photo
कुछ देर बाद दूसरी जगह पर भी ऐसा ही हुआ। बल्लूपुर चौक के पास लोगों को मकानों के बीच अचानक मोबाइल टावर दिखा। स्थानीय लोगों ने मोहल्ले के बीच मोबाइल टावर का विरोध किया, तो करीब दस मिनट बाद टावर गायब हो गया।
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यह कोई कोरी कल्पना नहीं, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों की सिग्नल मजबूत करने की नई जुगत है। कंपनियों ने मोबाइल टावर ऑन व्हील्स का यह नया प्रयोग किया है। पिछले कुछ समय से मोहल्लों में मोबाइल टावर से निकलने वाली तरंगों को लेकर विरोधाभास से कंपनियों को यह तरीका तलाशना पड़ा। यही नहीं, इमारतों पर लगे करीब दो दर्जन अवैध मोबाइल टावरों को एमडीडीए सील कर चुका है।
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इसके अलावा बड़ी संख्या में मोबाइल टावरों का निर्माण रुका पड़ा है। ऐसे में तमाम क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी की समस्या पैदा हो गई है। लेकिन यह तरीका जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी सुधारने में खासा कारगर साबित हो रहा है, वहीं इसमें एमडीडीए की कार्रवाई का डर भी नहीं है।
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लोगों के विरोध की स्थिति में इसे हटाना और दूसरी जगह शिफ्ट करना भी खासा आसान है। राजधानी में अलग-अलग ऑपरेटरों के तीन दर्जन से ज्यादा मूवेबल टावर चल रहे हैं। ज्यादातर ऑपरेटर किसी खाली सड़क या प्लॉट पर इन टावरों को खड़ा कर देते हैं। इसमें एक ट्रॉली में मोबाइल टावर, जनरेटर और अन्य उपकरण लगे हैं।
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एमडीडीए केवल जमीन पर किए गए निर्माण के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। ट्रॉली पर लगे मोबाइल टावरों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार हमें नहीं है।
- प्रकाश चंद्र दुमका, सचिव, एमडीडीए