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आपदा: दादी की गोद से मासूम को छीन ले गया तेज सैलाब, फिर उसी 'सैलाब' ने ऐसे बचाई दो बच्चों की जान

Wed, 21 Aug 2019 08:39 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में रविवार सुबह आराकोट में जलजले ने दादी की गोद में सुरक्षित महसूस कर रहे एक वर्ष के मासूम सोबित पर भी रहम नहीं किया। इस परिवार के सभी सदस्य सुरक्षित बचने में कामयाब रहे, लेकिन सोबित सैलाब में बह गया। माकुड़ी गांव के सक्षम और हितेश खुशकिस्मत रहे। 
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
वे मलबे में दबे लेकिन पानी की तेज धार से मलबा हटने पर वे बाहर आने में कामयाब रहे। आपदा ने उनकी दादी, ताऊ-ताई, मां और बहन को उनसे छीन लिया। आपदा में परिजनों को खोने वाले परिवारों में मातम पसरा हुआ है।
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
आराकोट निवासी सोहन लाल ने बताया कि उनका बेटा रोहित हिमाचल में सेब के बगीचों में काम करता है। वह आजकल काम पर गया हुआ था। रविवार को घर में रोहित की पत्नी घरेलू कार्यों में व्यस्त थी और रोहित का एक साल का बेटा सोबित अपनी दादी की गोद में खेल रहा था। 

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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
रविवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे गांव के खड्ड में तेज आवाज के साथ सैलाब आ गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते पानी का जलजला घर तक पहुंच गया। सब लोग जान बचाने के लिए बाहर भागे, लेकिन इतने में हंसता खिलखिलाता सोबित दादी की गोद से छिटक कर सैलाब में बह गया। 
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
उसे बचाने की कोई कोशिश कामयाब नहीं हो पायी। इकलौते बेटे की मौत की खबर सुनकर रोहित भी हिमाचल से गांव लौट आया है। फिलहाल आराकोट इंटर कालेज में शरण लिए इस परिवार में मातम पसरा हुआ है। उधर, माकुड़ी गांव निवासी मदन सिंह रावत ने बताया कि रविवार तड़के गांव के ऊपरी हिस्से में बादल फटने से उफान के साथ आए मलबे में चतर सिंह का मकान दफन हो गया। 
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
हादसे के वक्त चतर सिंह और उसके भाई किशन सिंह का परिवार घर में ही था। मलबे में दफन होने के साथ ही घर के ऊपर से पानी का तेज सैलाब बहा, जिससे कुछ मलबा हटने पर किशन सिंह के बेटे सक्षम (15) और हितेश(13) बाहर निकल गए। लेकिन चतर सिंह और उनकी पत्नी कलावती, किशन सिंह की पत्नी कलावती, बेटी ऋतिका और मां श्रीमती देवी घर के साथ मलबे में दफन हो गए। 
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- फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो
इन सभी पांच लोगों के शव बरामद हो गए हैं। आपदा में घायल सक्षम और हितेश को हेलीकॉप्टर की मदद से उपचार के लिए देहरादून भेज दिया है। जबकि घायल होने के बावजूद किशन सिंह अपने मृत परिजनों की अंत्येष्टि के लिए गांव में ही रुके हैं।
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