मौनी अमावस्या पर दिन भर मौन रहकर साधना करने से स्नान का अमिट फल प्राप्त होता है। इस बार पितृकार्य, व्रत और स्नान तीनों के लिए दो अलग- अलग दिनों का प्रयोग किया गया है। पंचांगों में काल गणना के चलते मौनी अमावस्या का पर्व दो दिन पड़ा है।
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शिवपुराण में मौनी अमावस्या के महत्व के बारे में बताया गया है। माघ की मौनी अमावस्या बहुत फलदायी मानी जाती है। हिंदू धर्म में इसे सबसे बड़ी अमावस्या माना गया है।
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शिवपुराण में मौनी अमावस्या के महत्व के बारे में बताया गया है। उसमें कहा गया है कि जो इंसान इस दिन पवित्र नदी में स्नान करते है और सच्चे मन से दान करता है उस पर सभी ग्रहों-नक्षत्रों की विशेष कृपा मिलती है।
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- फोटो : kalash
मौनी अमावस्या के दिन सुबह स्नान करने के बाद घर की पूर्व दिशा में लाल कपड़ा बिछाकर जल से भरे दो कलश में तिल, उड़द व पीपल के पत्तों पर नारियल रखकर कलश स्थापित करें। इसके बाद भगवान शिव और विष्णु का पूजन करें।
पूजा के दौरान चमेली के तेल का दीपक जलाएं और गूगल से धूप करें। भगवान को लाल फूल, सिंदूर, हल्दी, केसर, चंदन अर्पित करें। इसके बाद गुड़ का भोग लगाकर चंदन की माला से 108 बार ‘ह्रीं हरिहर मद-गज-वाहनाय नमः॥’ मंत्र का जाप करें। पूजा करने के बाद गाय को गुड़ खिलाएं।