गुरुवार को जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए शहीद हुए उत्तराखंड के लाल शहीद सूरज ने आतंकी को ढेर करने के बाद ही अंतिम सांस ली। पढ़िए इस जाबांज की कहानी...
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सूरज सिंह दिलेर और बहादुरी के आगे दुश्मन भी टिक नहीं पाए। शहीद होने से पहले उन्होंने एक आतंकी को मार गिराया था।
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शहीद का पार्थिव शरीर लेकर गांव पहुंचे 50 आरआर के नायब सूबेदार महेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी पोस्टिंग पुलवामा जिले के लेदपुरा में थी। दो 2 नवंबर को सूचना मिली कि पोस्ट से तकरीबन दो किमी आगे सांभौरा में आंतकी छिपे हैं। इसके लिए सैनिकों ने ऑपरेशन चलाया
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शाम करीब सात से नौ बजे के बीच आतंकी ठिकाने की घेराबंदी की गई। इस दौरान ठिकाने में छिपे आतंकी ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं। कुछ देर तक चली मुठभेड़ में एक आतंकवादी को ढेर कर दिया था। इस मुठभेड़ में सूरज को भी गोली लगी।
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उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही वह शहीद हो गए। शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे जम्मू से सेना के हेलीकॉप्टर से उनके पार्थिव शरीर को देहरादून लाया गया।
यहां से सड़क मार्ग से शनिवार सुबह उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा। सूरज के साथ सेना में भर्ती हुए दिलबर, सहपाठी प्रदीप तोपाल और पंकज तोपाल का कहना है कि सूरज बचपन से ही बहादुर और दिलेर था।