फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मजदूरी कर घर के इकलौते चिराग को बनाया फौजी, शव देख फफक-फफक कर रो पड़े पिता, तस्वीरें देख दिल भर आएगा

Mon, 29 Oct 2018 08:22 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
1 of 5
शहीद राजेंद्र परिजन विलाप करते हुए
कश्मीर में पत्थरबाजों के हमले में शहीद हुए गंगोलीहाट के राजेंद्र को पिता ने घोड़े पर राशन ढोकर मिली मजदूरी के पैसे से फौजी बनाया था। बेटे के शव को तिरंगे में लिपटा देख माता-पिता के आंसू नहीं रुके। फौज में भर्ती होने तक राजेंद्र ने बेहद गरीबी में दिन बिताए।
विज्ञापन

2 of 5
शहीद राजेंद्र परिजन विलाप करते हुए
पिछली छुट्टी पर घर आए राजेंद्र की जिद पर ही पिता ने घोड़ा बेचा था। राजेंद्र के पिता चंद्र सिंह की माली हालत ठीक नहीं थी। परिवार चलाने के लिए वह घोड़ा चलाते थे। घोड़े पर डूनी से दुकानों का राशन ढोकर बेटे राजेंद्र और तीन बेटियों को गांव के स्कूल में पढ़ाया। घोड़े पर राशन ढोने से इतना पैसा भी नहीं मिल पाते थे कि चार बच्चों की जरूरतें पूरी हो सकें। 
विज्ञापन

3 of 5
शहीद राजेंद्र परिजन विलाप करते हुए
बेटा फौजी बना तो मुफलिसी में दिन बिता रहे पिता के साथ ही मां और तीन बहनों की आंखों में भी दिन बहुरने के सपने नजर आने लगे थे। राजेंद्र भर्ती होने के बाद से ही पिता से घोड़ा बेचने को कहता रहता था। पिछली छुट्टी आने पर राजेंद्र ने अपने पिता से कहा कि अब वह कमाने लगा है, ऐसे में उन्हें बुढ़ापे में घोड़े से सामान ढोने की जरूरत नहीं है।

4 of 5
शहीद राजेंद्र
राजेंद्र की जिद के बाद चंद्र सिंह ने घोड़ा बेच दिया था। उन्हें नहीं पता था कि काल के क्रूर हाथ उनसे उनके सपने ही छीन लेंगे। बेटे की शहादत की खबर सुनने के बाद से जीवन भर बड़े-बड़े बोझ उठाकर मेहनत-मजदूरी करने वाले चंद्र सिंह पूरी तरह से टूटे नजर आए।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
शहीद राजेंद्र सिंह
बता दें कि राजेंद्र सिंह बुंगला (23) पुत्र चंद्र सिंह जाट रेजीमेंट (टीए) में सिपाही थे। वह वर्ष 2015 में भर्ती हुए थे। शहीद के पिता चंद्र सिंह माता मोहनी देवी के साथ ही बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने सरकार से पत्थरबाजों को आतंकी घोषित करने की मांग भी की है। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें