शहीद राजेंद्र परिजन विलाप करते हुए
बेटा फौजी बना तो मुफलिसी में दिन बिता रहे पिता के साथ ही मां और तीन बहनों की आंखों में भी दिन बहुरने के सपने नजर आने लगे थे। राजेंद्र भर्ती होने के बाद से ही पिता से घोड़ा बेचने को कहता रहता था। पिछली छुट्टी आने पर राजेंद्र ने अपने पिता से कहा कि अब वह कमाने लगा है, ऐसे में उन्हें बुढ़ापे में घोड़े से सामान ढोने की जरूरत नहीं है।