आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए उत्तराखंड के लाल कमलेश पांडे ने बुधवार रात को ही फोन पर पिता से ढेर सारी बातें की थी। उनकी ये बातें आपकी आंखों में भी आंसू ला देंगी।
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मेजर कमलेश के पिता भुवन चंद पांडे ने बताया कि बेटे ने मोबाइल फोन पर रात को बात की थी। उन्होंने बताया कि आतंकियों के खिलाफ एक जरूरी ऑपरेशन चल रहा है।
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उन्हें भी इस ऑपरेशन में जाने का अवसर मिला है। वह ऑपरेशन के लिए जा रहे हैं और बाद में बात करेंगे। इतना कहते ही पिता फफक कर रो पड़े और रुंधे गले से बस इतना ही बोल पाए।
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कहा कमलेश का तो दुबारा फोन नहीं आया, लेकिन बृहस्पतिवार सुबह साढ़े आठ बजे सेना के एक अधिकारी की कॉल ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया। सैन्य अधिकारी ने बताया कि उनका बेटा शोपियां घाटी में आतंकियों से लड़ते हुए देश के लिए शहीद हो गया है।
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मेजर कमलेश पांडे के शहीद होने की जानकारी मिलते ही उनके पैतृक गांव दुगोली में मातम छा गया और सभी रिश्तेदार हल्द्वानी के लिए रवाना हो गए।इस मनहूस खबर से सदमे में आए पिता के हाथ से मोबाइल गिर पड़ा।
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उनके छोटे बेटे धीरज पांडे ने सैन्य अधिकारी से बातचीत कर घटना की जानकारी ली। मेजर के छोटे भाई धीरज पांडे मेरठ (उत्तर प्रदेश) में 9 इंफ्रेंटी बटालियन में वारंट ऑफिसर के पद पर तैनात हैं।
मेजर कमलेश पांडे ने तीन साल पहले हल्द्वानी के कांतिपुरम हिम्मतपुर तल्ला में मकान बनवाया था। शहादत की सूचना मिलने के बाद दोपहर में जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर (सेवानिवृत्त) बीएस रौतेला सहित कई लोग पिता को ढाढ़स बंधाने पहुंचे।