मंगल ग्रह 27 जून से अपनी उच्च राशि मकर में वक्री हो गया है। मंगल तीन माह के लिए वक्री हो रहा है। जिस कारण अगले तीन महीने यह बदलाव हलचल मचा देने वाला साबित होगा।
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ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश सेमवाल ने बताया कि मंगल ग्रह साहस और बल का वाहक है। इसलिए इसके प्रभाव भी उग्र होते हैं। जो लोग मंगल की महादशा, अंतर्दशा से गुजर रहे हैं, जिनकी जन्मकुंडली में मंगल वक्री या नेष्टप्रद हैं उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
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ऐसे लोगों पर कर्ज का बोझ बढ़ सकता है। उनके काम अटक सकते हैं। मकर शनि की राशि है जिसमें मंगल वक्री हो रहा है। शनि पहले से ही वक्री चल रहा है और मकर शनि की राशि है जिसमें मंगल वक्री हो रहा है तो दोनों ग्रह मंगल और शनि का एक साथ वक्रत्व काल में होना अशुभ हो जाता है।
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इस वक्रत्व काल के कारण सैन्य प्रधान देशों के हालात बिगड़ सकते हैं। देश में राजनीतिक हलचल तेज हो सकती है। किसी बड़े नेता की हानि हो सकती है।
दुनिया में बड़ी प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। बारिश के कारण तबाही मच सकती है। भूकंप, बाढ़, समुद्री तूफान, ज्वालामुखी, समुद्र में भूकंप जैसी घटनाएं हो सकती हैं।