पुलिस के हत्थे चढ़े 50 हजार के इनामी माओवादी देवेंद्र चम्याल ने ऐसे राज खोले हैं जिन्हें सुनकर पुलिस महकमा सकते में आ गया है। उत्तराखंड के भवाली में चुनाव विरोधी पर्चे चिपकाने और जिंदल स्कूल के खिलाफ नानीसार में पर्चे फेंकने की घटना में शामिल होने की बात स्वीकार की है। माओवादी के साथ पकड़ी गई भगवती भोज तीन साल से उसके संगठन से जुड़ी है। दोनों पंचेश्वर बांध विरोधी मिशन पर लगे थे।
विज्ञापन
2 of 5
bhagwati
इस मामले में संगठन को जमीनी स्तर पर तैयार किया जा रहा है। देवेंद्र ने झारखंड के कलिशिया में रहकर हथियार चलाने का भी प्रशिक्षण लिया था। उसने 50 हजार के इनामी साथी खीम सिंह बोरा और भाष्कर पांडे सहित अन्य लोगों के बारे में भी अहम जानकारी दी है। डीआईजी पूरन सिंह रावत और एसएसपी जन्मेजय खंडूरी ने रविवार को पत्रकारों को बताया कि शनिवार को माओवादियों के मूवमेंट की एक सटीक सूचना पर थानाध्यक्ष संजय जोशी, सिपाही ललित श्रीवास्तव, धीरज जोशी, गीता चंद, एसओटीएफ के उपनिरीक्षक रमेश चंद्र सिंह के साथ इरफान ने नंधौर वैली की ओर जा रही एक बस को रोका।
विज्ञापन
3 of 5
Maoist
बस की तलाशी लेने पर अल्मोड़ा जिले के दसांऊ नगरखान पेटशाल निवासी देवेंद्र चम्याल पुत्र मदन सिंह चम्याल के साथ लखनाड़ी सोमेश्वर निवासी भगवती भोज पुत्री शिव सिंह भोज को माओवादी विचारधारा से संबंधित पर्चे ओर पोस्टर के साथ गिरफ्तार कर लिया। पकड़े जाने पर देवेंद्र ने अपने कई गलत नाम बताए लेकिन नाम उसके हाथ पर डी गुदा था, इसी कारण पुलिस को समझने में देर नहीं लगी कि वह देवेंद्र चम्याल है। पता चला कि दोनों ने 21 सितंबर को अल्मोड़ा में उत्तराखंड जोनल कमेटी के सचिव खीम सिंह बोरा से मुलाकात की थी। फरवरी 2017 में अपने पांच अन्य साथियों के साथ उन्होंने धारी क्षेत्र में माओवादी पंफलेट, पोस्टर और झंडे लगाए थे। इसके अलावा दीवारों पर राज्य विरोधी, चुनाव विरोधी नारे भी लिखे थे। देवेंद्र ने बताया कि नानकमत्ता थाना क्षेत्र की घटना में इनाम घोषित होने के बाद वह 2009 से 2013 तक झारखंड में रहा। लौटने पर 2014 में उसकी मुलाकात भगवती भोज से हुई।
4 of 5
bhagwati
भगवती अपना परिवार छोड़कर माओवादी संगठन का कार्य करने के लिए तैयार हो गई। पुलिस ने दोनों से संगठन के कई सदस्यों के बारे में जानकारी हासिल की है। डीजीपी ने पुलिस टीम को 20 हजार रुपये का इनाम और कांस्टेबल इरफान को पुलिस पदक दिलाने की घोषणा की है। देवेंद्र चम्याल की सहयोगी महिला भगवती भोज ने पुलिस के हत्थे चढ़ने पर अपने मोबाइल के मैसेज मिटा दिए। पुलिस का कहना है कि मोबाइल में किस प्रकार के मैसेज थे एसओजी की टीम इसकी जांच करेगी।
दिल्ली से आई आईबी की टीम ने गिरफ्तार माओवादी और उसकी महिला सहायक से पूछताछ की। देवेंद्र ने बताया कि वह 1998 से माओवाद से जुड़ गया था। उसकी महिला मित्र भी संगठन के लिए तीन सालों से समर्पित है। दोनों ने पुरानी घटनाओं में शामिल होना स्वीकार किया। संगठन के लोगों को टास्क के मुताबिक आने जाने के खर्च अलावा कम से कम 2000 रुपये महीने मिलते थे। पैसे कुरियर के माध्यम से आते थे। महिला साथी को वह खर्च के लिए कुछ पैसे देता था। बताया कि प्रशांत राही की गिरफ्तारी के बाद उत्तराखंड में संगठन टूट गया था। इसी कारण संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी उसके ऊपर थी। पहाड़ के लोग उसके संगठन में सहयोग नहीं करते हैं। यहां ठोस आधार नहीं होने के कारण उसने सिर्फ लोगों को भड़काने का जिम्मा लिया था।