उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश में भागीरथी के बदले रुख से गंगोत्री ग्लेशियर के दाहिने हिस्से में दरारें आ गई हैं। इससे ग्लेशियर के और टूटने का खतरा बढ़ गया है।
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ग्लेशियर पिघलने से भागीरथी नदी का जलस्तर बढ़ा
- फोटो : Amar Ujala
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान में स्थिति की प्रारंभिक सूचना मिलने के बाद विज्ञानियों की टीम स्थिति के अध्ययन में जुट गई है। बताया जा रहा है कि भागीरथी रक्तवन के अंदर की तरफ रुख कर रही है। इसके साथ ही नदी के ऊपरी हिस्से में झील बनने का अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है।
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वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान को बेस कैंपों और क्षेत्र से सूचना मिली है कि जहां गंगोत्री ग्लेशियर का आखिरी शिरा है, वहां बाईं तरफ ग्लेशियर के 40 मीटर हिस्से में दरारें आ गईं हैं। इसकी वजह भागीरथी नदी के बहाव में बदलाव बताया जा रहा है।
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आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर बहाव और अंदर की तरफ आया तो ग्लेशियर टूट सकता है। रक्तवन की तरफ गंगोत्री ग्लेशियर का सहायक ग्लेशियर भी है।
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विज्ञानियों की टीम ने बदली स्थिति का अध्ययन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही यह भी अंदेशा व्यक्त किया जा रहा है कि ग्लेशियर के आसपास नई झील बन गई है। इसकी पुष्टि करने के लिए एनडीआरएफ की टीम मौके पर गई है।
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सूत्रों का कहना है कि भागीरथी में पानी घटने से झील बनने की आशंका पैदा हो गई है। इसके अलावा गंगोत्री ग्लेशियर का आखिरी शिरा चार किमी पीछे खिसक गया है।
हिमाचल की सतलुज, रावी, पार्वती और ब्यास नदियों के हिम स्रोत पिछले 25 वर्षों में 450 वर्गमीटर तक सिकुड़ चुके हैं।
वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि हाल में ही उन्होंने क्षेत्र का जायजा लिया। ग्लेशियर का शिरा चार किमी पीछे खिसका है। वर्ष 2008 में जो एटलस तैयार किया गया था उसमें गंगोत्री ग्लेशियर 30 किमी लंबा और साढ़े तीन किमी चौड़ा बताया गया था।