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शहीद मानवेंद्र ने आखिरी बार मां-पिता और पत्नी से की थी ये बातें, पढ़कर आंसू नहीं रोक पाएंगे

Mon, 18 Jun 2018 06:42 AM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रुद्रप्रयाग
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Martyr manvendra singh
जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा में गुरुवार को शहीद हुए मानवेंद्र सिंह ने उसी रात अपने परिवार से जो बाते की थी पढ़कर आप भी भावुक हो जाएंगे।
 
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Martyr manvendra singh
मानवेंद्र ने मुठभेड़ पर जाने से पहले बुधवार रात को करीब 8.30 बजे अपने पिता नरेंद्र सिंह रावत, मां कमला देवी और मायके गए पत्नी विनिता सहित दोनों बच्चों से बातचीत की। उनकी कुशलक्षेम पूछने के साथ ही अपने बारे में बताया। कहा, कि इन दिनों यहां काफी तनाव है। सीमा पर से लगातार फायरिंग हो रही है, जिससे हर समय खतरा बना हुआ है।
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Martyr manvendra singh
इसके बाद रात को 11.30 बजे मानवेंद्र आतंकी मुठभेड़ में बुरी तरह जख्मी हो गए। उन्हें सेना के अस्पताल लाया गया। जहां से उन्होंने अपनी पत्नी और माता-पिता से आखिरी बार बात करते हुए स्थिति से अवगत कराया। मानवेंद्र की आवाज सुनते ही माता पिता की आंखों में सैलाब आ गया। इसके बाद देर रात 3.30 बजे वे शहीद हो गए।

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Martyr manvendra singh
शुक्रवार को प्रात: 9.30 सेना के हेलीकॉप्टर से शहीद का शव जौलीग्रांट पहुंचने की उम्मीद है। जहां से गौचर लाने के बाद गांव पहुंचाया जाएगा। बांदीपुरा में तैनात सूबेदार मेजर नरेंद्र सिंह ने बताया कि रात 10.30 से मुठभेड़ शुरू हो गई थी। दोनों तरफ से फायरिंग हो रही थी। इस दौरान हमारी तरफ से जवानों से दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। तभी एक के बाद एक दो गोलियां मानवेंद्र को जा लगी, जिससे वह बुरी तरह से लहुलहुहान हो गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया।
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Martyr manvendra singh
यहां लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। इसके बाद सेना द्वारा बृहस्पतिवार तड़के मानवेंद्र के घर फोन कर उन्हें घटना से अवगत कराया गया,फौजी पिता नरेंद्र सिंह से प्रेरणा से लेते हुए मानवेंद्र सिंह इंटरामिडिएट के उपरांत वर्ष 2007 में सेना में भर्ती हुए। सात भाई-बहनों में तीसरे मानवेंद्र का विवाह 2011 में रामपुर-बडासू निवासी विनिता से हुआ। वर्ष 2013 में मानवेंद्र की पत्नी ने बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम जान्हवी रखा गया।
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जबकि 2015 में बेटा अनुराग पैदा हुआ। करीब चार वर्ष पूर्व देहरादून के नगरौंदा में जमीन खरीदकर वहां मकान भी बना लिया था। तीज-त्यौहार व घर-परिवार के छोटे-बड़े कार्यो में मानवेंद्र परिवार सहित शामिल होते रहते। बताया कि स्कूली जीवन से जरूरतमंदों की मदद करता रहता था। फौज में भर्ती होने के बाद भी जब भी वह छुट्टी पर घर पहुंचता, सब लोगों से मिलने घरों पर जाता था। इस वर्ष मई माह में वह घर आया था। करीब 15 दिन घर में रहा था। ग्राम प्रधान विनोद रावत ने बताया कि गांव ने अपना होनहार बेटा खो दिया है। इधर, उप जिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने बताया कि सेना के मुख्यालय से जवान के शहीद होने की सूचना मिल गई है।
 
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