मुंह में जुबान और जबड़ा नहीं, कैंसर ने छीन लिया, जब दो शब्द बोलने की मोहताजी हो, ऐसे हालात में दून के संदीप गोयल सुरीली आवाज में नगमे गा रहे हैं। सुनकर यकीन नहीं होता, देखकर अचरज होता है,, मगर यह है हकीकत। संदीप को शहर के कई आयोजनों में गाते देखा जा सकता है। स्टेज पर उनके हल्के से थरथराते होठों से जब नगमे बाहर आते हैं, पार्श्व में उद्घोषक का गूंजता स्वर उनकी कहानी बताता है, तब लोग जान पाते हैं कि संदीप की जिजीविषा के आगे न केवल कैंसर ने घुटने टेक दिए, मौत ने मुंह मोड़ लिया, बल्कि उनकी पहली चाहत संगीत उनके जीवन को महका रही है। संदीप गोयल की स्वर लहरियां इन दिनों सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहीं हैं।
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