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अद्भुत मंदिरः रोज होता है चमत्कार, शिव की प्रतिमा के सामने खुद जलती है ज्योत

Mon, 05 Sep 2016 07:51 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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mahasu temple hanol
‌उत्तराखंड में भी एक ऐसा शिव मंदिर है जहां भगवान शिव की मूर्ति के सामने खुद एक दिव्य ज्योति जलती रहती है। यहां पानी को प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
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देहरादून जिले में त्यूनी-मोरी रोड के नजदीक स्थित इस मंदिर में भक्तों की अगाध आस्‍था है। यहां सैड़कों भक्त दर्शनार्थ आते हैं। यहां वह जो भी मनोकामना मांगते हैं, वह जरूर पूरी होती है।
 
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दिलचस्प है कि यहां हर साल दिल्ली से राष्ट्रपति भवन को ओर से नमक भेंट किया जाता है। मिश्रित शैली की स्थापत्य कला को संजोए यह मंदिर देहरादून से 190 किमी और मसूरी से 156 किमी दूर है। यह मंदिर टोंस नदी के पूर्वी तकट पर स्थित है।
 

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प्रकृति की गोद में बसा यह प्रसिद्ध मंदिर है 'महासू देवता का मंदिर'। हनोल मन्दिर तीन कक्षों में बना हुआ है, मन्दिर में प्रवेश करते ही पहला कक्ष है जिसमें बैठकर बाजगी पारंपरिक नौबत बजाते हैं।
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महिलाएं और पुरुष मुख्य मण्डप में प्रवेश कर सकते हैं। मुख्य मण्डप एक बड़ा कमरा है जिसमें बायीं तरफ चारों महासुओं के चारों वीर कफला वीर (बासिक महासू), गुडारु वीर (पबासिक महासू), कैलू वीर (बूठिया महासू) तथा शैडकुडिया वीर (चालदा महासू) के चार छोटे छोटे पौराणिक मन्दिर स्थित हैं।
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इसी कक्ष में मन्दिर के पुजारी तथा अन्य पश्वा (वे लोग जिन पर महासू देवता अवतरित होकर भक्तों की समस्याओं का समाधान देते हैं) बैठा करते हैं। मन्दिर के इसी कक्ष में गर्भगृह के लिये छोटा सा दरवाजा है जिसके अन्दर केवल पुजारी ही प्रवेश कर सकते हैं। गर्भगृह के अन्दर भगवान शिव के प्रतिरूप महासू देवता की मूर्ति स्थापित है।
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गर्भगृह में स्वच्छ जल की एक अविरल धारा बहती रहती है। मन्दिर में आये भक्तों को यह जल प्रसाद के रूप में दिया जाता है। इसके अलावा इसी गर्भगृह में एक दिव्य ज्योत सदैव जलती रहती है। मुख्य मन्दिर अर्थात गर्भगृह पूर्णतया पौराणिक है तथा पुरातत्व विभाग के अनुसार इसका छत्र नागरशैली का बना हुआ है। इसके अलावा मण्डप तथा मुख्य मण्डप का निर्माण बाद में किया गया है।
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इस मन्दिर की निर्माण शैली इसे उत्तराखण्ड के अन्य मन्दिरों से भिन्न तथा विशिष्ट करती है। वास्तुकला की दृष्टि से मन्दिर का निर्माण नवीं शताब्दी के आस-पास का माना जाता है।
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