पालात तक जाने वाली इस गुफा में भगवान शिव विराजते हैं। जमीन से करीब 120 किमी. गहराई में मौजूद इस गुफा में जाकर आपको अद्भुत नजारे देखने को मिलेंगे। उत्तराखंड के कुमाऊं में अल्मोड़ा से शेराघाट होते हुए 160 किमी. की दूरी तय करके गंगोलीहाट कस्बे में मौजूद यह गुफा किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इस गुफाओं में चारों युगों के प्रतीक रूप में चार पत्थर स्थापित हैं। इनमें से एक पत्थर जिसे कलियुग का प्रतीक माना जाता है, वह धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है। माना जाता है कि जिस दिन यह कलियुग का प्रतीक पत्थर दीवार से टकरा जाएगा, उस दिन कलियुग का अंत हो जाएगा। वहीं स्कंदपुराण में वर्णन है कि स्वयं महादेव शिव पाताल भुवनेश्वर में विराजमान रहते हैं और अन्य देवी-देवता उनकी स्तुति करने यहां आते हैं। यह भी कहा जात है कि त्रेता युग में अयोध्या के सूर्यवंशी राजा ऋतुपर्ण जब एक जंगली हिरण का पीछा करते हुए इस गुफा में आ गए थे तो उन्होंने इस गुफा के अंदर महादेव शिव सहित 33 कोटि देवताओं के साक्षात दर्शन किए थे।