ज्योतिषाचार्यों की मानें तो महाशिवरात्रि व्रत प्रदोष निशीथ काल में ही करना चाहिए। शिवरात्रि में चार प्रहरों में चार बार अलग-अलग विधि से पूजा का प्रावधान है। प्रहरों में अगर इन मंत्रों का जाप करें तो भोलेनाथ खुश हो जाते हैं।
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Mahashivratri
- फोटो : Amar Ujala
ज्योतिषाचार्य राजीव नौटियाल ने बताया कि जो व्यक्ति इस व्रत को पूर्ण विधि-विधान से करने में असमर्थ हो, उन्हें रात्रि के प्रारम्भ में तथा अर्धरात्रि में भगवान शिव का पूजन अवश्य करना चाहिए।
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Virbhadra Temple
- फोटो : amar ujala
महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में भगवान शिव की ईशान मूर्ति को दुग्ध द्वारा स्नान कराएं। दूसरे प्रहर में उनकी अघोर मूर्ति को दही से स्नान करवाएं।
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tapkeshwar mahadev
- फोटो : अमरउजाला
तीसरे प्रहर में घी से स्नान कराएं व चौथे प्रहर में उनकी सद्योजात मूर्ति को मधु द्वारा स्नान करवाएं। इससे भगवान आशुतोष अतिप्रसन्न होते हैं।
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tapkeshwar temple
ये हैं शुभ मुहूर्त:
महा निशीथ काल पूजा का समय : रात 12.04 से 12.56 बजे तक
पहले प्रहर की पूजा का समय : शाम 6.05 से रात 9.20 बजे तक
रात दूसरे प्रहर की पूजा का समय : 9.20 से 12.35 बजे तक
रात्रि तीसरे प्रहर की पूजा का समय : 12.35 3.49 बजे तक
रात्रि चौथे प्रहर की पूजा का समय : 3.49 से सुबह 5.04 बजे तक
इन मंत्रों का करें जाप:
1. महाशिवरात्रि के प्रथम प्रहर में संकल्प करके शिव को दुग्ध से स्नान कराते हुए 'ॐ ह्रीं ईशानाय नम:' का जाप करना चाहिए।
2. द्वितीय प्रहर में दही स्नान करके 'ॐ ह्रीं अघोराय नम:' का जाप करना चाहिए।
3. तृतीय प्रहर में घृत (घी) स्नान करके 'ॐ ह्रीं वामदेवाय नम:' का जाप करना चाहिए।
4. चतुर्थ प्रहर में मधु स्नान करके 'ॐ ह्रीं सद्योजाताय नम:' का जाप करना चाहिए।