महाशिवरात्रि के मौके पर हम आपको दिखाते हैं वो जगह जहां पर भगवान शिव और माता पार्वती की शादी हुई थी। आज के दिन को लोग उनकी सालगिरह के रूप में मनाते हैं। तस्वीरें देखिए...
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मान्यता है कि देवभूमि उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में त्रियुगीनारायण मंदिर शिव पार्वती के पवित्र विवाह का साक्षी है। उनके विवाह की अखंड ज्योति आज भी यहां जल रही है।
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कहते हैं इसी ज्योति के फेरे लेकर वे शादी के बंधन में बंधे थे। इस ज्योति के दर्शन करने के लिए यहां भक्तों की भीड़ लगी रहती है। शिवरात्रि के मौके पर आने वाले दंपत्तियों का जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहता है।
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मान्यता है कि इस ज्योति की भस्म में सौभाग्य और सफलता मिलती है। इसलिए लोग इसे अपने साथ भी ले जाते हैं। खास बात यह है कि यह ज्योति कभी बुझती नहीं है। सर्दी हो या गर्मी यह ज्योति हमेशा जलती रहती है।
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त्रियुगीनारायण मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। यह भी मान्यता है कि इस स्थान पर विष्णु भगवान ने वामन देवता का अवतार लिया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार यहां देवी पार्वती ने जब भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तप किया।
उनके नाम पर यहां गौरी कुंड बना है जिसका जल बहुत पवित्र माना जाता है। इस स्थान पर आदिगुरु शंकराचार्य भी आए थे। उन्होंने भगवान शिव और मां पार्वती की प्राचीन प्रतिमाएं स्थापित कराईं।