इस बार रक्षाबंधन पर पड़ने वाला चंद्रग्रहण कई मायनों में अहम है। यह ग्रहण केवल कई राशियों पर ही नहीं बल्कि कई राज्यों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
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raksha bandhan
सूर्य और चंद्र ग्रहण के पर्व पर पड़ने से मनुष्य जीवन पूरी तरह प्रभावित होता है। इस बार पूर्णिमा के दिन पड़ रहा चंद्रग्रहण आधी रात के समय पूरे देश में दिखाई पड़ेगा।
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disaster
भारतीय प्राच्य विद्या सोसायटी के अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य डा. प्रतीक मिश्रपुरी के अनुसार हालांकि यह पूरे भारत में दिखाई देगा, लेकिन इसका असर कई देशों व राज्यों में प्रभाव डालेगा।
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राशिचक्र
उनका कहना है कि कश्मीर, मेघालय, नागालैंड, मध्यप्रदेश, भूटान, चीन, पाकिस्तान एवं काबुल में ग्रहण से प्राकृतिक आपदाएं आ सकती हैं। ग्रहण से कई जगह भौगोलिक परिवर्तन भी संभव है। उनका कहना है कि ग्रहण का असर केवल उसी दिन नहीं बल्कि कई दिनों तक रहता है। इसलिए संभल कर रहने की जरूरत है।
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राशिचक्र
उन्होंने बताया कि यह ग्रहण रात्रि 10:52 बजे से 12:48 बजे तक कहीं न कहीं बना रहेगा। चंदग्रहण की अवधि 1:55 मिनट रहेगी। इस कारण ग्रहण का सूतक सात अगस्त को रक्षाबंधन के दिन दोपहर 1:53 बजे से शुरू हो जाएगा।
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- फोटो : Reuters
शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए। यही वजह है कि रक्षा बंधन का श्रावणी उपकर्म पहले ही पंचमी के दिन हो चुका है। सूतक काल में रक्षाबंधन भी शास्त्र में वर्जित है। चूडामणि चंद्रग्रहण का सूतक लगने से पहले ही राखी बांध देनी चाहिए।
डा. प्रतीक मिश्रपुरी ने बताया कि मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, धनु, मकर तथा कुंभ राशियों के लिए चंद्रग्रहण शुभ नहीं रहेगा। इसके विपरीत मिथुन, तुला, वृश्चिक और मीन राशियों के लिए यह ग्रहण बेहद लाभप्रद हैं।