चंद्रग्रहण के समय खाने में तुलसी का पत्ता रखा जाता है। आइए जानते हैं कि सदियाें से ऐसा क्यों किया जा रहा है। कहा जाता है कि चंद्रग्रहण के समय बना हुआ खाना खराब हो जाता है। इसलिए तुलसी का पत्ता रखा जाता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित सुशातंराज के अनुसार, तुलसी में पारा होता है। पारा के ऊपर किसी भी किरणों का कोई असर नहीं होता है। चंद्रग्रहण के समय पराबैंगनी किरणों सबसे ज्यादा बुरा असर होता है। इसलिए खाने में तुलसी का पत्त रखने से वह निष्क्रिय हो जाती हैं।
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वहीं धार्मिक दृष्टि से देखें तो तुलसी दोषों का नाश करने वाली होती है। इसलिए नेगेटिव ऊर्जा खत्म करने के लिए इसका प्रयोग होता है। वहीं चरणामृत में भी इसका इस्तेमाल इसलिए ही किया जाता है कि इसे अमृत समान समझा जाता है।
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- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि ग्रहण शुरु होने के 9 घंटे पहले सूतक काल शुरु हो जाता है। इसलिए इससे पहले ही पानी के बर्तन में, दूध में और दही में कुश या तुलसी की पत्ती या दूब धोकर डालनी चाहिए। बाद में इसे पीपल के पेड़ पर चढ़ा दें।
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चंद्रग्रहण एक अशुभ घटना है और इसकी छाया से बचने के लिए लोग ग्रहण के बाद स्नान-दान करते हैं। इस दौरान चांद देखने की भी मनाही होती है।
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चंद्र ग्रहण
खासतौर पर कुंवारी कन्याओं, गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों और बुजुर्गों को ग्रहण के चांद से रहने की सलाह दी जाती है। चंद्र ग्रहण के दौरान तो कई काम करने की मनाही होती है लेकिन ग्रहण के बाद अपना रुटीन शुरू करने से पहले भी कुछ नियम पूरे करने होते हैं।
दरअसल चंद्र ग्रहण का प्रभाव 108 दिन तक माना जाता है। ऐसे में ग्रहण के कारण आई नकारात्मकता दूर करने के लिए ग्रहण खत्म होने के बाद कुछ उपाय करने जरूरत होती है। ग्रहण के बाद घर की अच्छी तरह सफाई भी आवश्यक बताई गई है।