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यहां नहाने के बाद भर जाती है गोद, भगवान शिव-पार्वती के विवाह से जुड़ा रहस्य

Mon, 11 Jun 2018 05:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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saraswati kund
अद्भुत कुंड का नाम है सरस्वती कुंड,  इसका निर्माण विष्णु की नासिका से हुआ था और इसलिए ऐसी मान्यता है कि इन कुंड में स्नान से संतानहीनता से मुक्ति मिल जाती है। भगवान शिव के विवाह से जुड़ा है यह रहस्यमय कुंड, जानिए...
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इसी ज्योति के सामने विवाह के फेरे हुए थे
भगवान शिव के विवाह को लेकर कई तरह की कथाएं अलग-अलग धर्म ग्रंथों में प्रचलित हैं। कहते हैं कि भगवान शिव ने माता पार्वती से जिस ज्योति के सामने विवाह के फेरे लिए थे, वह त्रेतायुग से आजतक जल रही है। यह स्थान त्रियुगीनारायण में है।
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lord shiva and parvati
हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार पर्वतराज हिमावत या हिमावन की पुत्री थी पार्वती। माता पार्वती ने कठिन ध्यान और साधना से भगवान शिव का वरण किया था। जिस स्थान पर मां पार्वती ने साधना की उस स्थान को गौरीकुंड कहा जाता है। जो श्रद्धालु त्रियुगीनारायण जाते हैं वे गौरीकुंड के दर्शन भी करते हैं। पौराणिक ग्रंथ बताते हैं कि शिव जी ने गुप्त काशी में माता पार्वती के सामने विवाह प्रस्ताव रखा था।

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triyuginarayana temple
दोनों का विवाह त्रियुगीनारायण गांव में मंदाकिनी सोन और गंगा के मिलन स्थल पर संपन्न हुआ। यहां शिव पार्वती के विवाह में विष्णु ने पार्वती के भाई के रूप में सभी रीतियों का पालन किया था। जबकि ब्रह्मा इस विवाह में पुरोहित बने थे।
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statue of lord shiva and parvati
विवाह से पहले सभी देवताओं ने यहां स्नान भी किया और इसलिए यहां तीन कुंड बने। जिन्हें रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड कहते हैं। इन तीनों कुंड में जल सरस्वती कुंड से आता है। 
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