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भगवान जगन्नाथ के लिए महिलाओं ने बंद किए मंदिर के द्वार, छिपा है एक रहस्य

Mon, 26 Jun 2017 09:27 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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Lord Jagannath yatra - फोटो : amarujala
श्री जगन्नाथ के जयकारों के साथ जब भगवान की डोली अपने घर पहुंची तो वहां मौजूद महिलाओं ने मंदिर के दरवाजे भगवान के लिए बंद कर दिए। यह एक रोचक परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है। 
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Lord Jagannath yatra - फोटो : amarujala
इससे पहले श्री जगन्नाथ जी के जयकारों के साथ धूमधाम से भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने छेहरा-पहरा के साथ किया। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता का संदेश देने के साथ ही एक सामुदायिक भवन का शुभारंभ भी किया। 
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Lord Jagannath yatra - फोटो : amarujala
दीपलोक स्थित श्रीराम मंदिर से यात्रा की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने झाड़ू लगाकर यात्रा के लिए रास्ता साफ किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता में ही भगवान का वास होता है। लिहाजा छहरा-पहरा यानी यात्रा से पहले झाड़ू लगाना एक अच्छी परंपरा है।

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Lord Jagannath yatra - फोटो : amarujala
परंपरा के अनुसार, किशन नगर चौक स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर को श्री जगन्नाथ जी की मौसी का घर माना जाता है। दीपलोक स्थित श्रीराम मंदिर से निकली यात्रा जैसे ही श्री राधा कृष्ण मंदिर पहुंची, यहां मौसी के रूप में महिलाओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया।
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Lord Jagannath yatra - फोटो : amarujala
भगवान जगन्नाथ पत्नी लक्ष्मी जी को लिए बिना ही यात्रा कर आते हैं। माना जाता है कि इससे लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं। वह सहेलियों के साथ पति के आने की प्रतीक्षा करती हैं, लेकिन जैसे ही जगन्नाथ जी आ जाते हैं वह दरवाजा बंद कर लेती हैं।
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Lord Jagannath yatra - फोटो : amarujala
इस बार भी महिलाओं ने लक्ष्मी जी की ओर से बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। पुरुषों ने बाहर से जगन्नाथ जी का पक्ष रखा। जगन्नाथ जी आखिरकार जब लक्ष्मी जी को मौसी के घर से लाए गए उपहार, साड़ी आदि भेंट करते हैं तब लक्ष्मी जी भगवान जगन्नाथ को भीतर आने देती हैं।
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