श्री जगन्नाथ के जयकारों के साथ जब भगवान की डोली अपने घर पहुंची तो वहां मौजूद महिलाओं ने मंदिर के दरवाजे भगवान के लिए बंद कर दिए। यह एक रोचक परंपरा है जो सदियों से चली आ रही है।
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Lord Jagannath yatra
- फोटो : amarujala
इससे पहले श्री जगन्नाथ जी के जयकारों के साथ धूमधाम से भगवान जगन्नाथ रथयात्रा निकाली गई। रथयात्रा का शुभारंभ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने छेहरा-पहरा के साथ किया। इस दौरान उन्होंने स्वच्छता का संदेश देने के साथ ही एक सामुदायिक भवन का शुभारंभ भी किया।
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दीपलोक स्थित श्रीराम मंदिर से यात्रा की शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने झाड़ू लगाकर यात्रा के लिए रास्ता साफ किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छता में ही भगवान का वास होता है। लिहाजा छहरा-पहरा यानी यात्रा से पहले झाड़ू लगाना एक अच्छी परंपरा है।
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परंपरा के अनुसार, किशन नगर चौक स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर को श्री जगन्नाथ जी की मौसी का घर माना जाता है। दीपलोक स्थित श्रीराम मंदिर से निकली यात्रा जैसे ही श्री राधा कृष्ण मंदिर पहुंची, यहां मौसी के रूप में महिलाओं ने यात्रा का भव्य स्वागत किया।
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भगवान जगन्नाथ पत्नी लक्ष्मी जी को लिए बिना ही यात्रा कर आते हैं। माना जाता है कि इससे लक्ष्मी जी नाराज हो जाती हैं। वह सहेलियों के साथ पति के आने की प्रतीक्षा करती हैं, लेकिन जैसे ही जगन्नाथ जी आ जाते हैं वह दरवाजा बंद कर लेती हैं।
इस बार भी महिलाओं ने लक्ष्मी जी की ओर से बाहर से दरवाजा बंद कर दिया। पुरुषों ने बाहर से जगन्नाथ जी का पक्ष रखा। जगन्नाथ जी आखिरकार जब लक्ष्मी जी को मौसी के घर से लाए गए उपहार, साड़ी आदि भेंट करते हैं तब लक्ष्मी जी भगवान जगन्नाथ को भीतर आने देती हैं।