पंडित नेहरू दिल्ली से कार से रानीखेत पहुंचे, यहां से भिकियासैंण गए। वहां उनकी चुनावी सभा हुई, लेकिन सभा में जुटी भीड़ में कांग्रेस की सफेद टोपी धारण करने वाले कम सोशलिस्ट पार्टी की लाल टोपी पहने लोग अधिक थे। उस चुनाव में माहरा 80 वोटों से हार गए और मदन मोहन उपाध्याय पांच वोटों के अंतर से चुनाव जीते थे।
तकनीक के इस दौर में चुनाव के लिए ईवीएम से लेकर वीवीपैट जैसी कंप्यूटराइज मशीनों का इस्तेमाल होने लगा है, लेकिन 1952 के दौर में चुनाव सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न होते थे। प्रत्येक बूथों में कनस्तर काटकर बैलेट बॉक्स रखे जाते थे, बॉक्सों के बाहर दलों का चुनाव चिह्न चस्पा होता था। चुनाव सामग्री का अभाव था, तो लोग अपने-अपने दलों की रंगीन टोपियां धारण करते थे।