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लोकसभा चुनाव 2019: उत्तराखंड की पौड़ी सीट पर जनरल खंडूड़ी के बेटे और चेले के बीच होगी जंग

Fri, 22 Mar 2019 09:15 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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बीसी खंडूड़ी - फोटो : AmarUjala
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद मेजर जनरल (रिटा.) बीसी खंडूड़ी के चुनाव लड़ने से इंकार कर देने के बाद पार्टी ने उनके सबसे नजदीकी माने जाने वाले पूर्व मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय सचिव तीरथ सिंह रावत को पौड़ी गढ़वाल से उम्मीदवार बनाया है।
 
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तीरथ सिंह रावत
तीरथ सिंह रावत आज अपना पर्चा दाखिल करेंगे। उनके जनरल खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी से टक्कर होने की संभावना जताई जा रही है। कांग्रेस उनके खिलाफ मनीष खंडूड़ी को मैदान में उतार रही है। इस कारण जनरल खंडूड़ी के बेटे और प्रिय चेले की चुनावी जंग के चलते ये सीट काफी दिलचस्प हो गई है।
 
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बीसी खंडूड़ी - फोटो : AmarUjala
भाजपा दबदबे वाली गढ़वाल लोकसभा सीट पर जनरल खंडूड़ी पांच बार सांसद रहे हैं। गढ़वाल (पौड़ी) लोकसभा सीट पारंपरिक रूप से कांग्रेस वर्चस्व वाली रही है। इस सीट पर अब तक हुए 16 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस आठ बार विजयी रही। इनमें से सात चुनाव उसने 1984 लोकसभा चुनाव तक जीते। हालांकि इसके बाद उसे जीत का स्वाद चखने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। उसके दबदबे वाली सीट से एक बार जनाधार खिसका तो फिर खिसकता चला गया। 

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भाजपा सांसद भुवन चंद्र खंडूड़ी के बेटे मनीष खंडूड़ी - फोटो : अमर उजाला
पुलवामा आतंकी हमले के बाद ये माना जा रहा था कि भाजपा इस सीट पर किसी सैन्य पृष्ठभूमि के उम्मीदवार को मैदान में उतारेगी। जनरल के चुनाव लड़ने से मना कर देने के बाद पार्टी ने उनके नजदीकी तीरथ सिंह रावत को मैदान में उतारने का फैसला लिया। जनरल खंडूड़ी ने जहां अपने बेटे को आशीर्वाद दिया है तो चुनाव में भाजपा और तीरथ को समर्थन देने की बात कही है।
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bc khanduri - फोटो : File Photo
राज्य गठन के बाद 2009 में कांग्रेस ने इस सीट पर वापसी की। लेकिन 70 के दशक तक गढ़वाल के मतदाताओं पर कांग्रेस का जादू सिर चढ़कर बोला। इस सीट पर लगातार चार बार चुनाव जीतने का रिकार्ड डॉ. भक्त दर्शन सिंह के नाम था, जो भाजपा के भुवन चंद्र खंडूड़ी ने 2014 लोकसभा के चुनाव में तोड़ा। लेकिन खंडूड़ी ने भक्तदर्शन सिंह की तरह चुनावों में लगातार जीत दर्ज नहीं की। 
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सतपाल महाराज
पौड़ी के मतदाताओं को इस बात का श्रेय जाता है कि उनके चुने हुए सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में तीन बार जगह मिली। पहली बार डॉ. भक्तदर्शन नेहरू कैबिनेट में शिक्षा मंत्री बने। फिर सतपाल महाराज को केंद्र सरकार में वित्त एवं रेलवे राज्यमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ और उनके बाद जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी अटल सरकार में केंद्रीय सड़क एवं भूतल मंत्री बने। 2007 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी लोस सीट पर 2008 में उपचुनाव हुआ। मतदाताओं के लिहाज से सैन्य बाहुल्य मानी जाने वाली इस सीट से भाजपा के जनरल टीपीएस रावत चुनाव जीते।
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बद्रीनाथ
भौगोलिक स्वरूप: गढ़वाल लोकसभा का समूचा भूभाग पर्वतीय है। इस लिहाज से ये सीट बेहद कठिन और दुरूह मानी जाती है। लोकसभा का एक हिस्सा चमोली जनपद में चीन की सीमा से सटा है तो दूसरा कुमाऊं की सीमा से लगा है। संसदीय सीट की सबसे बड़ी खासियत इसमें शामिल हिंदुओं के दो पवित्र धाम बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम हैं। राज्य के सभी प्रयाग भी इसी चुनाव क्षेत्र की सीमा में आते हैं। बद्रीनाथ, केदारनाथ, थराली, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, नरेंद्रनगर, यमकेश्वर, श्रीनगर, चौबट्टाखाल, लैंसडौन, कोटद्वार, पौड़ी, रामनगर और देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र इस सीट में शामिल हैं।
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