हीरा व्यापारी नीरव मोदी की तरह यहां बैंकों के करोड़ों रुपये बड़े बकाएदार दबाकर बैठ गए हैं। इन बकाएदारों से लगातार ऋण की रकम जमा कराने को कहा जा रहा है, लेकिन बैंकों को कामयाबी नहीं मिल पा रही है।
विज्ञापन
2 of 6
loan
हालात यह हैं कि खुद रिजर्व बैंक भी उत्तराखंड के बैंकों पर बढ़ते एनपीए के बोझ से चिंतित है। हाल ही में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक में भी एनपीए का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। प्रदेशभर में एक लाख 87 हजार 961 ऐसे डिफॉल्टर हैं, जो बैंकों से मोटा लोन लेकर बैठ गए हैं।
विज्ञापन
3 of 6
money
एसएलबीसी से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में कुल 37 बैंक हैं, जिनमें से 35 बैंकों का एनपीए 3242.83 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। जबकि 31 मार्च 2017 को यह आंकड़ा 2495.09 करोड़ था। 31 मार्च से 31 दिसंबर 2017 के बीच महज नौ माह में बैंकों का 747.74 करोड़ रुपये का लोन एनपीए हो गया। हालांकि अभी अप्रैल में पूरे वर्ष का एनपीए डाटा आएगा तो यह आंकड़ा और बढ़ा हुआ सामने आएगा।
4 of 6
PNB Scam
प्रदेश के बैंक इस एनपीए की वजह से लगातार गिरावट की ओर जा रहे हैं। जिससे बैंकिंग प्रणाली बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। बैंकों के आला अधिकारी दबी जुबान में यह भी बता रहे हैं कि यहां भी कई नीरव मोदी और मेहुंल चौकसी हैं जो कि बैंकों का पैसा लेकर फुर्र हो गए हैं। आंकड़ों पर यकीन करें तो पीएनबी का एनपीए सबसे ज्यादा है। इसके बाद एसबीआई और बीओबी का नंबर आता है। प्रदेशभर के कॉपरेटिव बैंकों पर भी एनपीए का दबाव तेजी से बढ़ रहा है।
विज्ञापन
5 of 6
प्रकाश पंत
- फोटो : SELF
मार्च 2017 में कॉपरेटिव बैंकों का 31283 लाख रुपये एनपीए था, लेकिन यह दिसंबर 2017 में बढ़कर 43992.20 लाख रुपये तक पहुंच गया। वहीं, वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि एनपीए को कम करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। अगर बैंक बड़े डिफॉल्टर की सूची उपलब्ध कराएं तो सरकार अपने स्तर से कार्रवाई को तैयार है।
इन बैंकों का सबसे ज्यादा एनपीए बैंक एनपीए खातों की संख्या कुल रकम (लाख में)
पंजाब नेशनल बैंक 32411 93544.54
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 26554 39694.78
बैंक ऑफ बड़ौदा 7305 30439.40
सभी कॉपरेटिव बैंक 49954 43992.20
क्या होता है एनपीए
जब तक ऋ णी समय पर ब्याज और किस्त अपने ऋ ण-खाते में जमा करता रहता है तो उसे स्टैंडर्ड खाता कहते हैं। जैसे ही उस खाते में ब्याज या किस्त या फि र दोनों तरह की रकम जमा होना बंद हो जाए, तो उसे एक निश्चित अवधि (फिलहाल 90 दिन) निर्धारित है, के बाद एनपीए या नॉन परफॉर्मिंग असेट खाता कहा जाता है।