दिल्ली की गद्दी पर तीन सदियों तक शासन करने वाले जिस मुगल साम्राज्य का वैभव पूरी दुनिया में मशहूर रहा आज उसके वंशज किस तरह जी रहे हैं ये जानकर आप दंग रह जाएंगे।
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- फोटो : AmarUjala
कोलकाता स्थित झुग्गी-झोपड़ी में मुफलिसी में जिंदगी बिता रहीं आखिरी मुगल सम्राट बहादुरशाह जफर की पौत्र वधू अपने मुंहबोले भाई के बुलावे पर इन दिनों देहरादून के विकासनगर आई हुई हैं।
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इस दौरान जब अमर उजाला संवाददाता ने उनसे बात की तो उनका दर्द छलक आया। कहा कि 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बहादुरशाह जफर ने देश से वफादारी का सबूत दिया लेकिन आज उनका खानदान मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर है।
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- फोटो : dailymail
जब उनसे पूछा गया कि इसका जिम्मेदार कौन है तो उन्होंने किसी एक को नहीं बल्कि आजादी के बाद से लेकर अब तक की सभी सरकारों को दोषी ठहराया। कहा स्वतंत्रता संग्राम में गद्दारी करने वाले राजघरानों के पास तो सबकुछ है पर असली स्वतंत्रता सेनानियों को कोई पूछने वाला नहीं है।
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- फोटो : rediff.com
उनकी ख्वाहिश है कि वे किसी तरह आखिरी मुगल सम्राट की मिट्टी रंगून से अपने वतन ला सकें। दिल्ली के महरौली स्थित जफर महल में आज भी बहादुरशाह की खाली कब्र मिट्टी का इंतजार कर रही है। लेकिन वह इसके लिए हाथ नहीं फैलाएंगी।
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वो बताती है कि उनके पति स्वर्गीय प्रिंस मिर्जा मोहम्मद बेदार बख्त बहादुर के इंतकाल के बाद 1981 में पेरिस के एक परिवार ने उन्हें अपने वतन चलने को कहा था लेकिन उन्होंने हिंदुस्तान में रहने को चुना। यही नहीं उन्हें पाकिस्तान से भी बुलावा आया पर उन्होंने उसे भी ठुकरा दिया।
सुल्ताना बेगम बताती हैं कि उनके पति स्वर्गीय प्रिंस मिर्जा मोहम्मद बेदार बख्त बहादुर को वर्ष 1980 तक महज 400 रुपये पेंशन मिलती थी। उनके इंतकाल के बाद यह पेंशन उन्हें मिलने लगी। वर्ष 2010 में इसे बढ़ाकर 6000 कर दिया गया, तब से इसी पेंशन के भरोसे किसी तरह उनका घर चल रहा है।