श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व व्रत शास्त्रानुसार रविवार को रहेगा। जबकि वैष्णव, योगी, यती, सन्यासियों का व्रत सोमवार को रहेगा।
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उत्तराखंड ज्योतिष रत्न से सम्मानित आचार्य डॉ. चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने बताया कि रविवार का यद्यपि दिन भर सप्तमी तिथि है, जबकि रात्रि 8 बजकर 48 मिनट से अष्टमी शुरू होगी।
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बताया कि इसी समय पर कृतिका नक्षत्र समाप्त होकर रोहिणी नक्षत्र आरंभ होगा। जिस नक्षत्र में भगवान श्रीकृष्ण का अवतार हुआ था। लिहाजा जन्माष्टमी का महत्व उस दिन रोहिणी नक्षत्र के साथ निहित होता है। इस दौरान भक्तों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा।
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krishna janmashtami 2018
इस दिन अगर आप दूसरों को नुकसान पहुंचाते हैं तो तीन गुना पाप आपको भोगना पड़ता है। जन्माष्टमी पर कोई बुरा काम न करें। अगर घर में कान्हा की कोई पुरानी मूर्ति है तो इस दिन उसकी पूजा भी करें।
जन्माष्टमी के व्रत पर घर में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लक्ष्मी खुश होती है। इस दिन घर में विवाद न करें। इस दिन भगवान कृष्ण के भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें। तुलसी भगवान को बेहद प्रिय है। जन्माष्टमी पर सात्विक भोजन करना चाहिए। इस दिन मांस, मछली और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए।