फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड निर्माण की कहानी: निहत्थों पर चली गोलियां, 42 शहादतों के बाद मिला अलग राज्य, याद कर सहम जाता है दिल

Thu, 01 Sep 2022 02:26 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, विकासनगर।
विज्ञापन
1 of 5
उत्तराखंड राज्य निर्माण की लड़ाई। - फोटो : अमर उजाला
साल 1994 में 'राज्य नहीं तो चुनाव नहीं' नारे का दौर था। ले मशालें चल पड़े हैं, लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा जीत लेंगे लोग मेरे गांव के गीत पर पृथक राज्य की मांग को लेकर मशाल जुलूस निकाले जा रहे थे। आज भी वो दिन याद कर दिल कांप जाता है जब एक सितंबर 1994 को खटीमा में गोली कांड को अंजाम दिया गया था। खटीमा गोली कांड के विरोध में जब दो सितंबर 1994 को मसूरी में विरोध-प्रदर्शन किया जा रहा था तो यहां भी निहत्थों पर गोलियां चला दी गईं।

इस आंदोलन के गवाह रहे यूकेडी के निवर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष और संयुक्त संघर्ष मोर्चा के प्रदेश सचिव रहे सुरेंद्र कुकरेती बताते हैं कि उनके नेतृत्व में पृथक राज्य गठन के पक्ष में 10 लाख शपथ पत्र भरवाए गए। तब राष्ट्रीय पार्टियों ने चुनाव न लड़ने का ऐलान किया, लेकिन चुनाव आते-आते राष्ट्रीय पार्टियों ने यूकेडी से धोखा कर दिया और चुनाव में उतर गईं।

राज्य आंदोलन के दौरान 31 दिन तक जेल में रहे सुरेंद्र कुकरेती बताते हैं कि खटीमा गोलीकांड के बाद मसूरी के झूला घर के सामने यह विरोध स्वाभाविक था। वे भी विरोध-प्रदर्शन का हिस्सा थे। दूर-दूर तक उन्हें किसी अनहोनी की आशंका नहीं थी। तभी अचानक पुलिस ने पहले लाठियां बरसाईं, फिर बिना चेतावनी के गोली चला दी। कोई हवाई फायरिंग और रबर की गोलियां नहीं दागीं गईं।
विज्ञापन

2 of 5
इंद्रमणि बडोनी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि महिलाएं आगे आई तो उन्हें भी गोली मार दी गई, जिसमें बेलमति चौहान और हंसा धनैई शहीद हो गईं। तब वहां मौजूद डीएसपी रहे उमाकांत त्रिपाठी ने गोली चलाए जाने का विरोध किया तो उन्हें भी गोली मार दी गई, जिन्हें बाद में शहीद का दर्जा मिला। फिर आंदोलन ने तेजी पकड़ ली और नौ नवंबर 2000 को 42 शहादत के बाद पृथक राज्य की प्राप्ति हुई। आज तक खटीमा और मसूरी गोली कांड के दोषियों को सजा नहीं मिली है।
विज्ञापन

3 of 5
उत्तराखंड राज्य निर्माण की लड़ाई। - फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र कुकरेती बताते हैं कि वर्ष 1996 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में देहरादून के ऐतिहासिक परेड ग्राउंड में रैली थी। आंदोलनकारी इसके विरोध का ऐलान कर चुके थे। मंच के आसपास सुरक्षा कड़ी थी। तब वे भेष बदल कर मंच के करीब पहुंचे।

4 of 5
उत्तराखंड राज्य निर्माण की लड़ाई। - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि उनकी मंशा मंच पर जाकर विरोध जताने की थी, लेकिन यह संभव नहीं हो पा रहा था। वह बचते बचाते किसी तरह मंच के नीचे पहुंचे और लाउड स्पीकरों की तारें खींच दीं। प्रधानमंत्री अटल बिहारी का भाषण बीच में ही रुक गया, जिससे खलबली मच गई। फिर क्या था रैपिड एक्सन फोर्स ने कुकरेती पर लाठियां बरसा दीं। वे बुरी तरह जख्मी हो गए।

ये भी पढ़ें...अंधविश्वास ने बनाया हैवान: पिता काटता रहा एक-एक कर सबके गले, मासूम की चीखें सुन पहुंचे पड़ोसी मंजर देख कांपे
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
उत्तराखंड राज्य निर्माण की लड़ाई। - फोटो : अमर उजाला
उन्हें अस्पताल ले जाया गया। फिर जेल भेज दिया गया। कान और आंखों में गंभीर चोटें आई। करीब एक साल तक उन्हें दिखाई नहीं दिया। उत्तराखंड आंदोलनकारी मंच के महासचिव जयकृष्ण सेमवाल ने बताया कि बृहस्पतिवार को शहीद स्थल अस्पताल रोड विकासनगर में खटीमा गोली कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें